भारतकोश
सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras

आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा

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कि तुम इस लोक में ही नहीं, परलोक में भी गोवर्धनधारी के रूप में प्रसिद्ध हो गए, परंतु आश्चर्य तो इस बात का है कि मैं तीनों लोकों के स्वामी अर्थात् तुम्हें अपने हृदय पर धारण किए रहती हूं और रात-दिन मैं तुम्हारी चिन्ता करती हूं, पर मुझे कोई त्रिलोकधारी जैसी पदवी नहीं देता।।19।। भाव यह है कि यश-सम्मान तो पुण्य और भाग्य से ही प्राप्त होता है।

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