भारतकोश
सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras

आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा

DevanagariHindipublished196 पृष्ठ

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से उत्तम है। सज्जनता सबसे बड़ा गुण है, यश सबसे उत्तम अलंकार (आभूषण) है, उत्तम विद्या सबसे श्रेष्ठ धन है और अपयश मृत्यु के समान सर्वाधिक कष्टकारक है॥4॥ आचार्य चाणक्य ने प्रस्तुत श्लोक में लोभ को दुर्गुणों की खान बताया है। यदि लोभ है तो अन्य दुर्गुण की क्या आवश्यकता? यदि चुगलखोरी का स्वभाव है तो और पातकों का क्या काम? यदि जीवन में सत्य है तो तप करने की क्या आवश्यकता? मन की शुद्धि से तीर्थ की, प्रेम है तो गुणों की, यश है तो आभूषणों की, श्रेष्ठ विद्या है तो धन की क्या आवश्यकता? इसी तरह अपयश है तो मृत्यु से क्या? पिता रत्नाकरो यस्य लक्ष्मीर्यस्य सहोदरा। शंखो भिक्षाटनं कुर्यान्नाऽदत्तमुपतिष्ठते॥ जिसका पिता समुद्र है, जिसकी बहन लक्ष्मी है, ऐसा होते हुए भी शंख भिक्षा मांगता है॥5॥ लक्ष्मी और शंख का जन्म समुद्र से ही माना जाता है। प्रायः देखा जाता है कि साधु लोग शंख बजाकर गृहस्थियों के घर से भिक्षा मांगते हैं। इसी से कहा गया है कि शंख भिक्षा मांगता है। भाव यह है कि एक ही कोख से जन्म लेने वालों का भाग्य अलग-अलग होता है। अशक्तस्तु भवेत्साधुर्ब्रह्मचारी च निर्धनः। व्याधिष्ठो देवभक्तश्च वृद्धा नारी पतिव्रता॥ शक्तिहीन मनुष्य साधु होता है, धनहीन व्यक्ति ब्रह्मचारी होता है, रोगी व्यक्ति देवभक्त और बूढ़ी स्त्री पतिव्रता होती है॥6॥ भाव यह है कि ये सभी लोग असमर्थ रहने के कारण से ही ऐसे हैं। अतः जो व्यक्ति प्रयास नहीं करता, परिश्रम नहीं करता, वह आलसी और निकम्मा होकर अपने को ऐसा बना 174 CC0. Vashishtha Tripathi Collection. Digitized by eGangotri