सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र
Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras
आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपांचों का विशेष महत्त्व है। जहां धनी व्यक्ति होंगे, वहां व्यापार अच्छा होगा। व्यापार अच्छा होगा तो आजीविका के साधन अच्छे होंगे। जहां श्रुतियों अर्थात वेदों के ज्ञाता ब्राह्मण होंगे, वहां मनुष्य जीवन के धार्मिक तथा ज्ञान के क्षेत्र में विस्तृत रूप से फैले हुए सभी शैक्षिक कार्यों को सहज रूप से सम्पन्न कर सकेगा। जहां स्वच्छ जल की नदी होगी, वहां जल का अभाव नहीं रहेगा और जहां कुशल वैद्य होंगे, वहां बीमारी पास नहीं आ सकेगी। इसी तरह शासन-व्यवस्था को सुचारु रूप देने के लिए राजा की आवश्यकता होती है और नदी अर्थात जल के बिना तो जीवन अधूरा है ही—इस प्रकार ये पांचों मनुष्य के सामाजिक जीवन के लिए परम आवश्यक हैं। जहां इनका अभाव हो वहां भूलकर भी निवास नहीं करना चाहिए। लोकयात्रा भयं लज्जा दाक्षिण्यं त्यागशीलता। पञ्च यत्र न विद्यन्ते न कुर्यात्त तत्र संस्थितिम्॥ जहां जीविका, भय, लज्जा, चतुराई और त्याग की भावना, ये पांचों न हों, वहां के लोगों का साथ कभी न करें॥10॥ जिस स्थान पर जीवन-यापन के साधन न हों, जहां सदैव भय की स्थितियां बनी रहती हों, जहां लज्जाशील व्यक्तियों की जगह बेशर्म और खुदगर्ज लोग रहते हों, जहां कला-कौशल और हस्तशिल्प का सर्वथा अभाव हो और जहां के लोगों के मन में जरा भी त्याग और परोपकार की भावनाएं न हों, वहां के लोगों के साथ न तो रहें और न ही उनसे व्यवहार करें। इसका भाव यही है कि आदमी को ऐसे स्थान पर रहना चाहिए जहां के लोग ईश्वर-भक्त हों, परोपकारी हों, व्यवहार-कुशल हों, आत्मसम्मानी हों, कर्मठ हों और बुद्धिमान हों। 21