सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र
Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras
आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें§ अथ द्वितीय अध्याय § अनृतं साहसं माया मूर्खत्वमतिलुब्धता। अशौचत्वं निर्दयत्वं स्त्रीणां दोषाः स्वभावजाः॥ झूठ बोलना, उतावलापन दिखाना, छल-कपट, मूर्खता, अत्यधिक लालच करना, अशुद्धता और दयाहीनता, ये सभी प्रकार के दोष स्त्रियों में स्वाभाविक रूप से मिलते हैं।।1।। स्त्रियों के विषय में चाणक्य की उपर्युक्त धारणा का कारण क्या रहा था, यह कहना तो कठिन है, परंतु सभी स्त्रियों में ये स्वाभाविक दुर्गुण हों, यह संभव नहीं है। चाणक्य के काल में स्त्री-शिक्षा का निश्चित रूप से अकाल रहा होगा। इसी आधार पर चाणक्य ने स्त्री को मूर्ख, लालची, अशुद्ध, झूठी, छली आदि कहा होगा, लेकिन दयाहीनता की भावना स्त्री का स्वाभाविक दोष नहीं माना जा सकता। इनमें से बहुत-से दोष पुरुषों में भी देखे जा सकते हैं। बल्कि झूठ बोलना, छल-कपट करना, दयाहीनता, लालच आदि दोष तो पुरुष वर्ग में ही अधिक पाए जा सकते हैं। गुण और दोष स्वभाव से भी होते हैं और उन्हें अर्जित भी किया जाता है, परंतु ये सभी परिस्थिति पर अधिक निर्भर करते हैं। 28 CC0. Vasisntha Tripathi Collection. Digitized by eGangotri