भारतकोश
सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras

आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा

DevanagariHindipublished196 पृष्ठ

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ऐसा मित्र, जो आपके मुंह पर तो मीठी-मीठी और चिकनी-चुपड़ी खुशामदी बातें करता हो और पीठ पीछे आपकी बुराई करता हो, आपके सारे कार्यों में विघ्न डालता हो, उसे तत्काल छोड़ देना चाहिए क्योंकि ऐसे लोग मित्र नहीं परम शत्रु होते हैं। ऐसे व्यक्ति 'आस्तीन के सांप' होते हैं। वे उसी प्रकार धोखा देने वाले होते हैं, जैसे कोई विष भरे घड़े के मुंह में गर्दन के आस-पास थोड़ा-सा दूध डालकर देने चला आए। वास्तविक मित्र वही होता है जो मुंह पर तो खरी-खोटी सुना देता है पर पीठ पीछे किसी को अपने मित्र की न तो निन्दा करने देता है और न उसके किसी कार्य को बिगाड़ने देता है। न विश्वसेत् कुमित्रे च मित्रे चाऽपि न विश्वसेत्। कदाचित् कुपितं मित्रं सर्वं गुह्यं प्रकाशयेत्॥ बुरे मित्र पर और अपने मित्र पर भी विश्वास नहीं करना चाहिए क्योंकि कभी नाराज होने पर संभवतः आपका विशिष्ट मित्र भी आपके सारे रहस्यों को प्रकट कर सकता है॥6॥ चाणक्य यहां मित्र के बारे में अत्यन्त सावधानी बरतने की ओर संकेत कर रहे हैं। उनका कहना है कि जो आपका विरोधी है, पर मित्र होने का दावा करता है, उस पर तो कभी विश्वास करना ही नहीं चाहिए। इसके अलावा जो आपका विश्वसनीय मित्र है, उसे भी आपको अपने परिवार तथा अपनी कोई भी बात ऐसी नहीं बतानी चाहिए जो आपको कभी शर्मिन्दा कर सके क्योंकि संभवतः किन्हीं विशेष परिस्थितियों में आपका मित्र यदि आपसे नाराज हो जाए तो वह आपके परिवार तथा आपके जीवन के उन अप्रिय गूढ़तम रहस्यों को प्रकट कर सकता है और आपको अपमानित होने तक की स्थिति में ला सकता है। 32 सम्पूर्ण चाणक्य नीति—2