सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र
Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras
आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसंस्कारवान बच्चे ही अपने कुल का नाम रोशन करते हैं। समाज उन्हें सम्मानित करता है। माता शत्रुः पिता वैरी येन बालो न पाठितः। न शोभते सभामध्ये हंसमध्ये बको यथा॥ जो माता-पिता अपने बच्चों को नहीं पढ़ाते, वे उनके शत्रु हैं। ऐसे अपढ़ बालक सभा के मध्य में उसी प्रकार शोभा नहीं पाते, जैसे हंसों के मध्य में बगुला शोभा नहीं पाता।।11।। बच्चे देश का भविष्य होते हैं। किसी भी राष्ट्र का चरित्र, वहां के बच्चों में देखा जा सकता है। इसी बात को ध्यान में रखकर आचार्य चाणक्य ने माता-पिता को उनके बच्चों की ओर से सचेत किया है। माता-पिता का कर्त्तव्य है कि वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा और संस्कार दिलाएं ताकि वे विद्वानों के मध्य बैठकर शोभा पा सकें। अपने संस्कारों और शिक्षा के तेज से ही वे शोभा पाते हैं। अन्यथा जैसे एक बगुला हंसों के बीच में शोभा नहीं पाता, उसी तरह मूर्ख और अनपढ़ बच्चे विद्वानों के मध्य शोभा नहीं पाते। शिक्षा से विहीन व्यक्ति बिना पूंछ का जानवर ही कहलाता है। अपने बच्चों को शिक्षित न करने वाले माता-पिता उसके शत्रु हैं। लालनाद् बहवो दोषास्ताडनाद् बहवो गुणाः। तस्मात्पुत्रं च शिष्यं च ताडयेन्न तु लालयेत्॥ अत्यधिक लाड़-प्यार से पुत्र और शिष्य गुणहीन हो जाते हैं और ताड़ना से गुणी हो जाते हैं। भाव यही है कि शिष्य और पुत्र को यदि ताड़ना का भय रहेगा तो वे गलत मार्ग पर नहीं जाएंगे।।12।। माता-पिता और गुरु की ताड़ना के पीछे पुत्र और शिष्य को ऊपर उठाने की भावना रहती है। वे उसे शारीरिक कष्ट 35 CCO. Vasishtha Tripathi Collection. Digitized by eGangotri