सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र
Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras
आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें॥ अथ तृतीय अध्याय ॥ कस्य दोषः कुले नास्ति व्याधिना को न पीडितः। व्यसनं केन न प्राप्तं कस्य सौख्यं निरन्तरम्॥ दोष किसके कुल में नहीं है? कौन ऐसा है, जिसे दुःख ने नहीं सताया? अवगुण किसे प्राप्त नहीं हुए? सदैव सुखी कौन रहता है?॥1॥ यह संसार दुःखों का सागर है। इस संसार में एक भी ऐसा व्यक्ति नहीं है, जिसे दुःख न हुआ हो। सभी व्यक्तियों में कुछ-न-कुछ दुःख, रोग और अवगुण अथवा कुछ-न-कुछ बुरी आदतें पाई जाती हैं। इस संसार में एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जो सदैव सुखी रहता हो। उसे किसी-न-किसी तरह के संकटों का, दुखों का, रोगों का, बुरी आदतों का सामना करना ही पड़ता है। दुःख और सुख तो साथ-साथ लगे ही रहते हैं। जैसे रात के बाद दिन और दिन के बाद रात आती है। आचारः कुलमाख्याति देशमाख्याति भाषणम्। सम्भ्रमः स्नेहमाख्याति वपुराख्याति भोजनम्॥ मनुष्य का आचरण-व्यवहार उसके खानदान को बताता 41 CC0. Vashishtha Tripathi Collection. Digitized by eGangotri