भारतकोश
सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras

आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा

DevanagariHindipublished196 पृष्ठ

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अर्थात् जो स्त्री अपने पति के प्रति पूरी तरह समर्पित है, जो भूलकर भी पर-पुरुष का ध्यान अपने मन में नहीं लाती, वह स्त्री रूप और गुणों में सर्वोत्तम है। व्यक्ति यदि कुरूप है, पर विद्वान है तो उसकी वह विद्वता ही उसका सौंदर्य है। जैसे महाज्ञानी अष्टावक्र शरीर से कुरूप होते हुए भी महाज्ञानी कहलाए और राजा जनक की सभा में सबसे अधिक सम्मानित हुए। इसी प्रकार जो तपस्वी सहृदय है, संवेदनशील है, क्षमा करना जानता है, वह अपनी इस सदाशयता के कारण ही शोभित होता है। त्यजेदेकं कुलस्यार्थे ग्रामस्यार्थे कुलं त्यजेत्। ग्रामं जनपदस्यार्थे आत्मार्थे पृथिवीं त्यजेत्॥ किसी एक व्यक्ति को त्यागने से यदि कुल की रक्षा होती हो तो उस एक को छोड़ देना चाहिए। पूरे गांव की भलाई के लिए कुल को तथा देश की भलाई के लिए गांव को और अपने आत्म-सम्मान की रक्षा के लिए सारी पृथ्वी को छोड़ देना चाहिए॥10॥ आचार्य चाणक्य ने यहां एक के सामने अनेक को महत्त्व दिया है। उनका कहना है कि यदि एक व्यक्ति के बलिदान से कुल का सम्मान बचता हो तो उसे बलिदान होने से नहीं रोकना चाहिए। यदि ग्राम की अस्मिता को बचाने के लिए पूरे परिवार का त्याग करना पड़े तो उसे छोड़ देना चाहिए और यदि देश के सम्मान की रक्षा के लिए ग्राम को त्यागना पड़े तो ग्राम का त्याग कर देना चाहिए। प्रायः सरहद पर युद्ध छिड़ जाने से सरहद के गांवों को खाली करा लिया जाता है। इसके अतिरिक्त आचार्य ने आत्म-सम्मान को सर्वोपरि माना है। 46 CC0. Vasisntha Tripathi Collection. Digitized by eGangotri