भारतकोश
सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras

आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा

DevanagariHindipublished196 पृष्ठ

पृष्ठ 63, कुल 196 में से

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में होती है, उसका सम्मान आवश्यक है। गुरु पिता के समान होता है अतः उसकी पत्नी भी माता समान होती है, सम्मान की पात्र है। मित्र का महत्त्व अत्यंत विश्वसनीय पात्र के रूप में है। मित्र सुख-दुख में बराबर का साथी होता है, अतः मित्र की पत्नी को भी माता के समान मानना चाहिए। पत्नी की माता, अर्थात सास को भी माता रूप में मानना चाहिए। पत्नी जो जीवनसंगिनी बन गई, उसकी मां को माता समान मानना चाहिए। अपनी मां तो मां होती ही है। उसके प्रति कर्त्तव्यों का निर्वाह करना चाहिए। अग्निदेवो द्विजातीनां मुनीनां हृदि दैवतम्। प्रतिमा स्वल्पबुद्धीनां सर्वत्र समदर्शिनः॥ अग्नि देव ब्राह्मणों, क्षत्रियों और वैश्यों के देवता हैं। ऋषि-मुनियों के देवता हृदय में हैं। अल्प बुद्धि वालों के देवता मूर्तियों में हैं और सारे संसार को समान रूप से देखने वालों के देवता सभी जगह निवास करते हैं॥21॥ जो तत्त्वज्ञानी हैं, जिन्होंने इस चराचर सृष्टि के रहस्य को जान लिया है, उनके लिए सम्पूर्ण ब्रह्मांड ही उस परम शक्तिसम्पन्न परमात्मा का घर है। वह कण-कण में व्याप्त है। सभी प्राणियों में है। जड़ में है, चेतन में है, परंतु दो बार जन्म लेने वाले, एक बार माता के गर्भ से और दूसरी बार गुरु के द्वारा संस्कारित होने पर, ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य अग्नि अर्थात 'यज्ञ' को ही अपना देवता मानते हैं। ऋषि-मुनि परमात्मा के स्वरूप का ध्यान अपने हृदय में करते हैं और अल्प बुद्धि लोग पत्थरों की मूर्ति में ही भगवान का स्वरूप तलाशते हैं। यह अपनी-अपनी आस्था की बात है। 61

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