भारतकोश
सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

सम्पूर्ण चाणक्य नीति एवं राजनीति सूत्र

Sampurna Chanakya Niti & Rajaniti Sutras

आचार्य चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) द्वारा

DevanagariHindipublished196 पृष्ठ

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आचार्य चाणक्य ने आयुर्वेदिक चिकित्सा का भी जगह-जगह अच्छा वर्णन किया है। इससे पता चलता है कि उन्हें आयुर्वेद का अच्छा ज्ञान था। हतं ज्ञानं क्रियाहीनं हतश्चाऽज्ञानतो नरः। हतं निर्नायकं सैन्यं स्त्रियो नष्टा ह्यभर्तृकाः॥ बिना क्रिया के ज्ञान व्यर्थ है, ज्ञानहीन मनुष्य मृतक के समान है, सेनापति के बिना सेना नष्ट हो जाती है और पति के बिना स्त्रियां पतित हो जाती हैं, अर्थात पति के बिना उनका जीवन व्यर्थ है॥8॥ यदि पढ़ा-लिखा व्यक्ति विद्या को व्यवहार में नहीं लाता तो उसका विद्या प्राप्त करना व्यर्थ है। इसी तरह अज्ञानी व्यक्ति के जीवन को भी व्यर्थ कहा गया है। भले-बुरे की समझ तो समझदार अर्थात ज्ञानी व्यक्ति को ही हो सकती है परंतु मूर्ख व्यक्ति को जब इसका ज्ञान ही नहीं तो वह भला किसका हित कर सकता है। सेनापति के अभाव में सेना दिग्भ्रमित होकर नष्ट हो जाती है और जिस स्त्री के सिर पर पति का साया न हो, उसकी रक्षा भला कौन करता है। सभी उसे पतन की ओर धकेलते हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि आचरण के बिना ज्ञान व्यर्थ है तथा पति के बिना स्त्री का कोई अस्तित्व नहीं होता। वृद्धकाले मृता भार्या बंधुहस्ते गतं धनम्। भोजनं च पराधीनं तिस्रः पुंसां विडम्बना॥ बुढ़ापे में स्त्री का मर जाना, बंधु के हाथों में धन का चला जाना और दूसरे के आसरे पर भोजन का प्राप्त होना, ये तीनों ही स्थितियां पुरुषों के लिए दुःखदायी हैं॥9॥ वृद्धावस्था में पत्नी ही सबसे बड़ा सहारा होती है और बचाकर रखा हुआ धन ही काम आता है। इससे आदमी भोजन के 97