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संस्कार विधि (महर्षि दयानन्द सरस्वती - षोडश वैदिक संस्कार एवं गुरुकुल विधान सटीक)

संस्कार विधि (महर्षि दयानन्द सरस्वती - षोडश वैदिक संस्कार एवं गुरुकुल विधान सटीक)

Sanskar Vidhi of Maharshi Dayananda Saraswati

महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 138, कुल 318 में से

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पृष्ठ 138

१३४ संस्कारविधिः जगदीश्वर आप, मुझ और सब पढ़ने-पढ़ानेवाले तथा सब संसार पर अपनी कृपा-दृष्टि से सबको सभ्य, विद्वान्, शरीर और आत्मा के बल से युक्त और परोपकारादि शुभ कर्मों की सिद्धि करने- कराने में चिरायु, स्वस्थ, पुरुषार्थी, उत्साही करें कि जिससे इस परमात्मा की सृष्टि में उसके गुण-कर्म-स्वभाव के अनुकूल अपने गुण-कर्म-स्वभावों को करके धर्मार्थ, काम और मोक्ष की सिद्धि कर-कराके सदा आनन्द में रहें॥' ॥ इति समावर्त्तनसंस्कारविधिः समाप्तः ॥

संस्कार विधि (महर्षि दयानन्द सरस्वती - षोडश वैदिक संस्कार एवं गुरुकुल विधान सटीक) · पृष्ठ 138, कुल 318 में से · BharatKosha