संस्कार विधि (महर्षि दयानन्द सरस्वती - षोडश वैदिक संस्कार एवं गुरुकुल विधान सटीक)
Sanskar Vidhi of Maharshi Dayananda Saraswati
महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंगृहाश्रमप्रकरणम् २२३ ओम् अग्ने॒ नय॑ सु॒पथा॑ रा॒येऽअ॒स्मान् विश्वा॑नि देव व॒युना॑नि वि॒द्वान्। यु॒यो॒ध्य॒स्मज्जु॑हुरा॒णमेनो॒ भूयि॑ष्ठां ते॒ नम॑ऽउक्तिं विधेम स्वाहा॑ ॥ ८ ॥ —यजुः० अ० ४०। मं० १६ ॥ इन आठ मन्त्रों से एक-एक मन्त्र करके एक-एक आहुति देनी, ऐसे आठ आहुति देके— ओम् सर्वं वै पूर्णꣳ स्वाहा ॥ इस मन्त्र से तीन पूर्णाहुति, अर्थात् एक-एक बार पढ़के एक-एक करके तीन आहुति देवे ॥ 'इत्यग्निहोत्रविधिः संक्षेपतः समाप्तः ॥ २ ॥ अथ पितृयज्ञः अग्निहोत्रविधि पूर्ण करके तीसरा पितृयज्ञ करे, अर्थात् जीते हुए माता-पिता आदि की यथावत् सेवा करना 'पितृयज्ञ' कहाता है ॥ ३ ॥ अथ बलिवैश्वदेवविधिः ओम् अग्नये स्वाहा। ओं सोमाय स्वाहा ॥ ओम् अग्नीषोमाभ्यां स्वाहा। ओं विश्वेभ्यो देवेभ्यः स्वाहा ॥ ओं धन्वन्तरये स्वाहा ॥ ओं कुह्वै स्वाहा ॥ ओं अनुमत्यै स्वाहा ॥ ओं प्रजापतये स्वाहा ॥ ओं द्यावापृथिवीभ्यां स्वाहा ॥ ओं स्विष्टकृते स्वाहा ॥