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संस्कार विधि (महर्षि दयानन्द सरस्वती - षोडश वैदिक संस्कार एवं गुरुकुल विधान सटीक)

संस्कार विधि (महर्षि दयानन्द सरस्वती - षोडश वैदिक संस्कार एवं गुरुकुल विधान सटीक)

Sanskar Vidhi of Maharshi Dayananda Saraswati

महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 304

३०० संस्कारविधिः प्रश्न—वाय्वालय किसको कहते हैं? उत्तर—अन्तरिक्ष को, जोकि यह पोल है। प्रश्न—क्या गरुड़पुराण आदि में जो यमलोक लिखा है वह झूठा है? उत्तर—अवश्य मिथ्या है। प्रश्न—पुनः संसार क्यों मानता है? उत्तर—वेद के [विषय में] अज्ञान और वेद-उपदेश के न होने से। जो यम की कथा लिख रक्खी है वह सब मिथ्या है, क्योंकि 'यम' इतने पदार्थों का नाम है— षळिद् य॒मा ऋष॑यो दे॒व॒जा इति॑ ॥ १ ॥ —ऋ० म० १। सू० १६४। मं० १५ ॥ शके॑म वा॒जिनो॒ यम॑म् ॥ २ ॥ —ऋ० म० २। सू० ५। मं० १ ॥ य॒माय॑ जुहुता ह॒विः। य॒मं ह॑ य॒ज्ञो ग॑च्छत्य॒ग्निदू॑तो अरं॑कृतः ॥ ३ ॥ —ऋ० म० १०। सू० १४। मं० १३ ॥ य॒मः सूयमा॑नो॒ विष्णु॑ः स॒म्भ्रियमा॑णो वा॒युः पू॒यमा॑नः ॥ ४ ॥ —यजुः० अ० ८। मं० ५७ ॥ वा॒जिनं॑ य॒मम् ॥ ५ ॥ —ऋ० म० ८। सू० २४। मं० २२ ॥ य॒मं मा॑त॒रिश्वान॑माहुः ॥ ६ ॥ —ऋ० म० १। सू० १६४। मं० ४६ ॥ अर्थ—यहाँ ऋतुओं का यम नाम है ॥ १ ॥ यहाँ परमेश्वर का नाम है ॥ २ ॥ यहाँ अग्नि का नाम है ॥ ३ ॥ यहाँ वायु, विद्युत्, सूर्य के यम नाम हैं ॥ ४ ॥ यहाँ भी वेगवाला होने से वायु का नाम यम है ॥ ५ ॥