संस्कार विधि (महर्षि दयानन्द सरस्वती - षोडश वैदिक संस्कार एवं गुरुकुल विधान सटीक)
Sanskar Vidhi of Maharshi Dayananda Saraswati
महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंगर्भाधानप्रकरणम् ४७ ओम् अग्नये पवमानाय स्वाहा। इदमग्नये पवमानाय–इदन्न मम॥ १ ॥ ओम् अग्नये पावकाय स्वाहा। इदमग्नये पावकाय–इदन्न मम॥ २ ॥ ओम् अग्नये शुचये स्वाहा। इदमग्नये शुचये–इदन्न मम॥ ३ ॥ ओम् अदित्यै स्वाहा॥ इदमदित्यै–इदन्न मम॥ ४॥ ओं प्रजापतये स्वाहा॥ इदं प्रजापतये–इदन्न मम॥ ५॥ ओं यदस्य कर्मणोऽत्यरीरिचं यद्वा न्यूनमिहाकरम्। अग्निष्टत्स्विष्टकृद्विद्यात्सर्वं स्विष्टं सुहुतं करोतु मे। अग्नये स्विष्टकृते सुहुतहुते सर्वप्रायश्चित्ताहुतीनां कामानां समर्धयित्रे सर्वान्नः कामान्त्समर्धय स्वाहा॥ इदमग्नये स्विष्टकृते–इदन्न मम॥ ६॥ इन छह मन्त्रों से उस भात की आहुति देवें। तत्पश्चात् पूर्व सामान्यप्रकरणोक्त ३४-३५ पृष्ठ-लिखित आठ मन्त्रों से अष्टाज्याहुति देनी। उन आठ मन्त्रों से आठ, तथा निम्नलिखित मन्त्रों से भी आज्याहुति देवें— विष्णुर्योनि॑ कल्पयतु॒ त्वष्टा॑ रू॒पाणि॑ पिंशतु। आ सि॑ञ्चतु प्र॒जाप॑तिर्धा॒ता गर्भं॑ दधातु ते॒ स्वाहा॑ ॥ १ ॥ गर्भं॑ धेहि सिनीवालि॒ गर्भं॑ धेहि सरस्वति। गर्भं॑ ते अ॒श्विनौ॑ दे॒वावा ध॑त्तां पुष्क॑रस्त्रजा॒ स्वाहा॑ ॥ २ ॥ हिर॒ण्ययी॑ अ॒रणी॒ यं नि॒र्मन्थ॑तो अ॒श्विना॑। तं ते॒ गर्भं॑ हवामहे दश॒मे मा॒सि सूत॑वे॒ स्वाहा॑ ॥ ३ ॥ —ऋ० मं १०। सू० १८४॥