भारतकोश
संस्कार विधि (महर्षि दयानन्द सरस्वती - षोडश वैदिक संस्कार एवं गुरुकुल विधान सटीक)

संस्कार विधि (महर्षि दयानन्द सरस्वती - षोडश वैदिक संस्कार एवं गुरुकुल विधान सटीक)

Sanskar Vidhi of Maharshi Dayananda Saraswati

महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 52, कुल 318 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 52

४८ संस्कारविधिः रेतो॒ मूत्रं॑ वि॒ जहा॑ति॒ योनिं॑ प्र॒विश॑दिन्द्रि॒यम्। गर्भो॑ जरा॒युणावृ॑त॒ऽउल्बं॑ जहाति॒ जन्म॑ना। ऋ॒तेन॑ स॒त्यमि॑न्द्रि॒यं वि॒पान॒ग्ं शुक्र॒मन्ध॑स॒ऽ इन्द्र॑स्येन्द्रि॒यमि॒दं पयो॒ऽमृतं॒ मधु॒ स्वाहा॑ ॥ ४ ॥ यत्ते सुसीमे हृदयं दिवि चन्द्रमसि श्रितम्। वेदाहं तन्मां तद्विद्यात् ॥ पश्येम शरदः शतं जीवेम शरदः शतꣳ शृणुयाम शरदः शतं प्रब्र॑वाम॒ शरदः शतमदी॑नाः स्याम शरदः शतं भूय॑श्च॒ शरदः शतात् स्वाहा॑ ॥ ५ ॥ -यजुर्वेदे॥ यथे॒यं पृ॑थि॒वी म॒ही भू॒तानां॒ गर्भ॑मा॒दधे॑। ए॒वा ते॑ ध्रियतां॒ गर्भो॒ अनु॑ सू॒तुं सवि॑त॒वे स्वाहा॑ ॥ ६ ॥ यथे॒यं पृ॑थि॒वी म॒ही दा॒धारे॒मान् व॒न॒स्पती॑न्। ए॒वा ते॑ ध्रियतां॒ गर्भो॒ अनु॑ सू॒तुं सवि॑त॒वे स्वाहा॑ ॥ ७ ॥ यथे॒यं पृ॑थि॒वी म॒ही दा॒धार॒ पर्व॑तान् गि॒रीन्। ए॒वा ते॑ ध्रियतां॒ गर्भो॒ अनु॑ सू॒तुं सवि॑त॒वे स्वाहा॑ ॥ ८ ॥ यथे॒यं पृ॑थि॒वी म॒ही दा॒धार॒ विष्ठि॑तं॒ जग॑त्। ए॒वा ते॑ ध्रियतां॒ गर्भो॒ अनु॑ सू॒तुं सवि॑तवे॒ स्वाहा॑ ॥ ९ ॥ -अथर्व० कां० ६। सू० १७॥ इन ९ मन्त्रों से नव आज्य और मोहनभोग की आहुति देके, नीचे लिखे मन्त्रों से भी चार घृताहुति देवें- ओं भूरग्नये स्वाहा॥ इदमग्नये-इदन्न मम ॥ १ ॥ ओं भुवर्वायवे स्वाहा॥ इदं वायवे-इदन्न मम ॥ २ ॥