भारतकोश
संस्कार विधि (महर्षि दयानन्द सरस्वती - षोडश वैदिक संस्कार एवं गुरुकुल विधान सटीक)

संस्कार विधि (महर्षि दयानन्द सरस्वती - षोडश वैदिक संस्कार एवं गुरुकुल विधान सटीक)

Sanskar Vidhi of Maharshi Dayananda Saraswati

महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा

DevanagariHindipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 88, कुल 318 में से

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पृष्ठ 88

८४ संस्कारविधिः आघारावाज्यभागाहुति चार और व्याहृति आहुति चार और पृष्ठ ३४ में लिखे प्रमाणे आठ आज्याहुति, सब मिलके सोलह आहुति देके, पृष्ठ ३४ में लिखे प्रमाणे “ओम् भूर्भुवः स्वः। अग्न आयूंषि०” इत्यादि मन्त्रों से चार आज्याहुति प्रधान होम की देके, पश्चात् पृष्ठ ३३ में लिखे प्रमाणे व्याहृति आहुति चार और पृष्ठ ३३ में लिखे प्रमाणे स्विष्टकृत् मन्त्र से एक आहुति मिलके पाँच घृत की आहुति देवे। इतनी क्रिया करके कर्मकर्त्ता परमात्मा का ध्यान करके नाई की ओर प्रथम देखके— ओम् आयम॑गन्त्सवि॒ता क्षुरेणो॒ष्णेन॑ वाय उद॒केनेहि॑। आदि॑त्या रु॒द्रा वस॑व उन्दन्तु॒ सचे॑त॒सः सोम॑स्य॒ राज्ञो॑ वप॒त् प्रचे॑तसः॥ —अथर्व० कां० ६। सू० ६८॥ इस मन्त्र का ज़प करके, पिता बालक के पृष्ठ-भाग में बैठके किञ्चित् उष्ण और किञ्चित् ठण्डा जल दोनों पात्रों में लेके— ओम् उष्णेन वाय उदकेनैधि॥ इस मन्त्र को बोलके दोनों पात्र का जल एक पात्र में मिला देवे। पश्चात् थोड़ा जल, थोड़ा माखन अथवा दही की मलाई लेके— ओम् अदि॑तिः श्मश्रु॑ वप॒त्वाप॑ उन्दन्तु॒ वर्च॑सा। चिकि॑त्सतु प्र॒जाप॑तिर्दी॒र्घायु॒त्वाय॒ चक्ष॑से॥१॥ —अथर्व० कां० ६। सू० ६८॥ ओं स॒वित्रा प्रसूता दैव्या आप उन्दन्तु ते तनूं दीर्घायुत्वाय वर्चसे॥२॥ इन मन्त्रों को बोलके, बालक के शिर के बालों में तीन बार हाथ फेरके केशों को भिगोवे। तत्पश्चात् कङ्घा लेके केशों को सुधारके इकट्ठा करे, अर्थात् बिखरे न रहे। तत्पश्चात्—

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