संतति शास्त्र
Santati Shastra
पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा
स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)
पृष्ठ 113, कुल 302 में से
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सन्तति-शास्त्र ।
१. गरम पदार्थके खाने और सूजाकके विकारसे ।
इस रोगमें ये लक्षण होते हैं ।
१. मूत्रमें जलन और पीला रंग ।
२. कड़क और रुक रुककर मूत्र निकलना ।
२. दूसरा भेद-इसके कई कारण हैं ।
१. मसानेपर सर्दीका पहुँचना ।
२. मसानेके पट्टोंमें दीलापन होनेसे ।
३. मसानेकी रक्तावदसे ।
इस रोगमें अनेक लक्षण होते हैं ।
१. सफेद मूत्रका आना और प्यास अधिक लगना ।
२. आप ही आप थोडेसे मूत्रका निकल जाया करता ।
३. कभी छिछड़ासा निकल आना ।
३. तीसरा भेद-इसके ये कारण हैं ।
१. मसानेकी सूजन और उसमें रक्त अम जानेसे ।
२. मसानेकी खुजली और घावसे ।
इस रोगमें अनेक लक्षण होते हैं ।
१. पेशाबकी रगतका लाल होना ।
२. मूत्रके साथ पीप और मांसके रेशोंका आना ।
इन रोगोंका किसी विशेष अवस्था में होना निश्चित नहीं है । जब चाहे तभी विकार उत्पन्न हो जाय, परन्तु यह रोग बच्चोंको कम होता है ।
४. अधिक मूत्रका आना ।
इसके कई कारण हैं ।
१. मसाने और उसके पट्टोंका उदकके कारण शो क० दीला पड़ जाना ।