संतति शास्त्र
Santati Shastra
पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा
स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)
पृष्ठ 127, कुल 302 में से
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सन्तति-शास्त्र ।
६ अगडोंकी गाँठने ।
१. इस रोगमें गाँठें पड़ जाती हैं और रज विगड़ जाता है : अतएव गर्भ नहीं रहता ।
७. अगडोंके मुन्ना बानेने ।
१. पैंसी दशामें रज नहीं आता । यदि आता भी है तो कम और निकम्मा, अतएव गर्भ नहीं रहता ।
८. अगडोंके जलोदरमे ।
१. इसमें रज विगड़कर अयोन्म्य हो जाता है अतएव गर्भ नहीं उहरता ।
३. अनेक प्रकारके दूषित रजमें ।
(इस विषयमें इसी पुस्तकका 'शुद्ध और दूषित रज-बीज्यं प्रकरणा देवी') ।
१. वायु दूषित रजमें ।
१. इस रोगमें रजका रंग काला और कुछ लाली लिये होता है । अतएव दूषित होकर विगड़ जाता है और गर्भ नहीं रहता ।
२. पित्तके दूषित रजमें ।
१. इस रोगमें रज लाली और पीलापन लिये होता है । अतएव दूषित हो जाता है । इससे गर्भ नहीं रहता ।
३. कफके दूषित रजमें ।
१. इस रोगमें रज लालीमें सफेदी लिये होता है और दूषित हो जाता है, अतएव गर्भ नहीं रहता ।
४. रक्तके दूषित रजमें ।
१. ऐसे रजमें सुदृक्तीसी बदबू आती है । अतएव रज विगड़कर गर्भ नहीं रहता ।