भारतकोश
संतति शास्त्र

संतति शास्त्र

Santati Shastra

पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा

स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)

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सन्तति-शास्त्र ।

जाती है और फिर वीर्य ग्रहण नहीं करती, अतएव गर्भ नहीं रहता ।

१४. उडावर्तिनी योनिसे ।

१. जिस योनिमें रक्त निकलनेसे तुरन्त चैन पड जावे, ऐसी दशामें योनि दूषित होकर वीर्य ग्रहण नहीं करती, अतएव गर्भ नहीं रहता ।

१५. अन्तर्मुखी योनिसे ।

१. खूब भोजन करके उलटे टेढ़े रीतिसे संयोग करने पर वायु योनि-मुखको टेढ़ा कर देती है, ऐसी योनि वीर्य ग्रहण नहीं करती, अतएव गर्भ नहीं रहता ।

१६. सूचीसुखी योनिसे ।

१. माताके दोपसे गर्भस्थ कन्याकी योनि दूषित होनेसे योनि-मुख छोटा हो जाता है । ऐसी योनि वीर्य ग्रहण नहीं करती, अतएव गर्भ नहीं रहता ।

१७. शुष्की योनिसे ।

१. जब मैथुनके समयमें स्त्री पाखाना पेशावके वेगको रोक ले, तो मालमूत्र रुककर योनि सूखी हो जाती है । ऐसी योनि वीर्य ग्रहण नहीं करती, अतएव गर्भ नहीं रहता ।

१८. वामिनी योनिसे ।

गर्भाशयमें गया हुआ वीर्य बारह निकल आता है और योनि वीर्य नहीं ग्रहण कर सकती, अतएव गर्भ नहीं रहता ।

१९. महायोनिसे ।

१. उलटे रीतिसे संयोग होनेपर वायुसे गर्भाशय और योनि-मुख बिगड जाता है, ऐसी योनि वीर्य ग्रहण नहीं करती, अतएव गर्भ नहीं रहता ।