संतति शास्त्र
Santati Shastra
पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा
स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)
पृष्ठ 138, कुल 302 में से
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२० वाहरी योनिकी सामूही सूजनसे ।
१. इस रोगमें मैथुन कष्टके साथ होता है, बड़े हुए रोगमें मवाद् पड जाता है । इस कारण गर्भ नहीं रहता ।
२१. योनिनी सडनसे ।
१. इस रोगमें घाव होकर सडन फैलती है अतएव मैथुन अत्यन्त कष्टसे होता है । इससे योनि दूषित हो जाती है । अतएव गर्भ नहीं रहता ।
२२. योनिकन्द ।
१. इस रोगमें बड़हलके फल समान योनिमें एक गाँठ उत्पन्न हो जाती है, अतएव गर्भ नहीं रहता ।
२३. योनिके घाव से ।
१. इस रोगमें अन्दर घाव पड जाते हैं, अत्यन्त पीड़ा और जलन होती है । अतएव योनि दूषित हो जाती है और गर्भ धारण नहीं कर सकती ।
२४. योनि-भृशसे ।
१. इस रोगमें योनि आगे या पीछे दल जाती है । इस कारण दूषित होनेसे गर्भ नहीं रहता ।
२५. योनिकी गहरी सूजन ।
१. इस रोगमें योनि-मार्ग बहुत तङ्ग हो जाता है, सूजन फैल जाती है । इस कारण योनि दूषित होकर गर्भ धारण नहीं करती ।
६. सोम रोगसे ।
१. इस रोगमें बहुत सूत्र आता है, मसाने अत्यन्त निर्बल हो जाते हैं और रज विगड़ जाता है, अतएव गर्भ नहीं ठहरता ।