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संतति शास्त्र

संतति शास्त्र

Santati Shastra

पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा

स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)

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गर्भ न रहनेके कारणों ।

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१४. वीर्य कीट उत्तम न होनेसे ।

१. जब वीर्य-कीट अर्थात् वीर्य-जन्तु अच्छे नहीं होते और उनमें कुदनेकी शक्ति नहीं होती, तो संयोग होने पर भी गर्भ नहीं रहता ।

१५. फोतेका न होना या अधूरा होना ।

१. प्रायः ऐसा होता है कि पुरुषके फोते अच्छी तरह नहीं उतरते । ऐसा होनेपर इस प्रकारके पुरुषसे गर्भ नहीं रहता ।

२. फोतेका अधूरा खिलना । इसका अर्थ यह है कि फोते का अधूरा बना होना है । ऐसी दशा में इस प्रकार के पुरुष के संयोगसे गर्भ नहीं रहता ।

३६. हस्तमैथुन करनेसे ।

१. वह पुरुष कि जो प्रसादके कारण एकान्तमें अपना वीर्य हाथसे मैथुनके तरीकेपर गिरा देते हैं उनकी लिंग-न्द्रिय स्थित्य पड़ जाती है, और वीर्य दूषित हो जाता है । अतएव उनसे गर्भ नहीं रहता । (रतिशास्त्र)

१७. फोतेकी नसोंका शोथ ।

१. फोतेमें एक प्रकारका शोथ हो जाता है । मांस और पनी बढ़ जाता है । इस प्रकारके बड़े रोग से फोते संयोग कालमें अपना काम ठीक ठीक नहीं कर सकते, अतएव गर्भ नहीं रहता । (शोक)

१८. गरमी और सूजाकसे ।

१. इन रोगोंसे वीर्य नष्ट हो जाता है और उसके वीर्य-जन्तु निकलने हो जाते हैं, अतएव बड़े हुए रोगमें गर्भ नहीं रहता ।

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