संतति शास्त्र
Santati Shastra
पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा
स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)
पृष्ठ 140, कुल 302 में से
संदर्भ में पढ़ेंगर्भ न रहनेके कारणों ।
११६
१४. वीर्य कीट उत्तम न होनेसे ।
१. जब वीर्य-कीट अर्थात् वीर्य-जन्तु अच्छे नहीं होते और उनमें कुदनेकी शक्ति नहीं होती, तो संयोग होने पर भी गर्भ नहीं रहता ।
१५. फोतेका न होना या अधूरा होना ।
१. प्रायः ऐसा होता है कि पुरुषके फोते अच्छी तरह नहीं उतरते । ऐसा होनेपर इस प्रकारके पुरुषसे गर्भ नहीं रहता ।
२. फोतेका अधूरा खिलना । इसका अर्थ यह है कि फोते का अधूरा बना होना है । ऐसी दशा में इस प्रकार के पुरुष के संयोगसे गर्भ नहीं रहता ।
३६. हस्तमैथुन करनेसे ।
१. वह पुरुष कि जो प्रसादके कारण एकान्तमें अपना वीर्य हाथसे मैथुनके तरीकेपर गिरा देते हैं उनकी लिंग-न्द्रिय स्थित्य पड़ जाती है, और वीर्य दूषित हो जाता है । अतएव उनसे गर्भ नहीं रहता । (रतिशास्त्र)
१७. फोतेकी नसोंका शोथ ।
१. फोतेमें एक प्रकारका शोथ हो जाता है । मांस और पनी बढ़ जाता है । इस प्रकारके बड़े रोग से फोते संयोग कालमें अपना काम ठीक ठीक नहीं कर सकते, अतएव गर्भ नहीं रहता । (शोक)
१८. गरमी और सूजाकसे ।
१. इन रोगोंसे वीर्य नष्ट हो जाता है और उसके वीर्य-जन्तु निकलने हो जाते हैं, अतएव बड़े हुए रोगमें गर्भ नहीं रहता ।