संतति शास्त्र
Santati Shastra
पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा
स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)
पृष्ठ 142, कुल 302 में से
संदर्भ में पढ़ेंगर्भ न रहनेके कारण ।
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कफके दूषित वीर्यसे ।
१. ऐसे वीर्यका रक्त सफेदी में पीलापन लिये होता है, अतएव इससे गर्भ नहीं रहता ।
४. खूनके दूषित वीर्यसे ।
१. इस रोग में वीर्य का रंग लाल होता है, अतएव ऐसे दूषित वीर्य से गर्भ नहीं रहता ।
५. कफ और वायुके दूषित वीर्यसे ।
१. ऐसे वीर्य में गांठ पड़ जाती हैं, अतएव दूषित हो जाता है और गर्भ नहीं रहता ।
६. पित्त और कफके दूषित वीर्यसे ।
१. ऐसे वीर्यमें बदबू आती है और वीर्य पीप के समान हो जाता है । अतएव इससे गर्भ नहीं रहता ।
७. पित्तऔर वायुके दूषित वीर्यसे ।
१. ऐसा वीर्य कमज़ोर रहता है । अतएव इससे गर्भ नहीं रहता ।
८. वात, पित्त और कफके दूषित वीर्य से ।
१. ऐसे वीर्यमें मलमूत्रकी बदबू सी आती है, अतएव दूषित होने से गर्भ नहीं रहता ।
२४-लिंगके अत्यन्त मोटे और टेढ़े होनेसे ।
१. ऐसी दशामें वीर्य उस स्थान पर नहीं पहुँच सकता जहाँ पर कि वीर्य को पहुँचना चाहिये । अतएव गर्भ नहीं रहता । (रत्नशिखर)
(३) स्त्री और पुरुषके मिले हुए दोषोंसे ।
२५. स्त्री पुरुष दोनोंके एक साथ स्वलिप्त न होनेसे ।
१. गर्भ तभी रहता है जब कि स्त्री और पुरुष दोनों एक