भारतकोश
संतति शास्त्र

संतति शास्त्र

Santati Shastra

पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा

स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)

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सन्तति-शास्त्र ।

२. वैद्यकका मत ।

१. ग्यारहवीं रात्रिके गर्भाधानसे त्रेक्ष्या या गुप्त व्यभिचार करानेवाली कन्या उत्पन्न होती है । (रतिशास्त्र)

३. हिन्दुओंका प्राचीन मत ।

१ एक बार भोजने कालिदाससे पूछा कि—“कर्मका बुरा फल कैसे होता है ?” कालिदासने उत्तर दिया कि—जिस प्रकार ग्यारहवीं रात्रिके गर्भसे दुष्ट सन्तान है। (भो०का०प०)

४. तेरहवीं रात्रि क्यों वर्जित है।

१ धर्मशास्त्रका मत ।

१. इस बातको कि तेरहवीं रात्रिमें गर्भाधान न करना चाहिये मनु और सुश्रुतने माना है । परन्तु फारण नहीं लिखा । केवल इतना ही लिखा है कि यह निन्दित रात्रि है । दूसरे ग्रन्थोंसे पता चलता है कि—

तेरहवीं रात्रिमें गर्भाधान होनेसे पापिनी और वर्षासंकर करनेवाली अर्थात् व्यभिचारिणी, अन्य पुत्रोंसे संयोग करनेवाली, कन्या उत्पन्न होती है । (नि० विन्दु)

२ वैद्यकका मत ।

१. नेरहवीं रात्रिको गर्भाधान होनेसे कुरुपा और कुलटा कन्या उत्पन्न होती है । (रतिशास्त्र)

चारों रात्रि पहलेकी और ग्यारहवीं व तेरहवीं रात्रियों का निर्णय, जहाँ तक प्रमाण मिले हैं, किया गया है । सोलह रात्रियोंमें ये छ रात्रियाँ जो निषिद्ध मानी गई हैं, निकास कर दस रात्रि बचीं । श्रव इनका विचार करना भी जरूरी है ।

५. गर्भधारण योग्य दस रात्रियाँ ।

१ धर्मशास्त्रका मत ॥

१. इन रात्रियोंके निर्णयका सम्बन्ध धर्मशास्त्रसे विशेष है;