संतति शास्त्र
Santati Shastra
पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा
स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)
पृष्ठ 152, कुल 302 में से
संदर्भ में पढ़ेंगर्भाधानका समय ।
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क्योंकि मनु महाराजने इन्होंको अंग माना है। इनमें पर्व, तिथि, दिन और समयका विचार आवश्यक है।
६. पर्व और तिथिपर विचार ।
१. धर्मशास्त्रका मत ।
१. अमावस्या, अष्टमी, पूर्णिमा और चतुर्दशीको खीसे संयोग न करना चाहिये । ( मनु० ॐ २ श्लो० १२८ )
२. ऊपर कहे हुए मनुको प्रमाणके अनुसार गौतम स्मृति अ० ५ श्लो० १ और वृ० पा० अ० ४ श्लो० ६६ और विष्णु स्मृति अ० ६८ में भी पाया गया है ।
३. छठ, अष्टमी, चौथ, दोनों पक्षोंकी चतुर्दशी और अमावस्या तथा पूर्णिमा इनमें संयोग व गर्भाधान न करना चाहिये । ( नि० विष्णु )
४. श्राद्ध तिथियोंमें संयोग न करना चाहिये । ( वृ० नारद )
७. पर्व दिनका विचार ।
१. धर्मशास्त्रका मत ।
१. खियोंसे संयोग करनेमें मनुष्यको पर्व दिन छोड़ देना चाहिये । ( मनु० ॐ ४ श्लो० ८५ )
२. ऊपर कहे हुए प्रमाणके अनुसार वसिष्ठ स्मृति अ० १२ श्लो० १८ और वृ० पा० अ० ४ श्लो० ६६ में भी पाया गया है ।
पर्व दिनमें व्यतीपात, प्रदोष, एकादशी, संकान्ति, ग्रहण, रामनवमी, जन्माष्टमी इत्यादि हैं ।
८. पर्व समयपर विचार ।
१. धर्मशास्त्रका मत ।
१. पर्व समयमें खी-संयोग न होना चाहिये । ( वृ० पा० अ० ४ )