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संतति शास्त्र

संतति शास्त्र

Santati Shastra

पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा

स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)

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अल्पजीवी और दीर्घजीवी सन्तान कैसे होती ? २२६

होगी वही प्रबल होगा और वही तेज धातुके साथ नेत्रोंमें पहुँचेगा। माता जैसा भोजन करती है उसीके अनुसार शरीर में वात पित्त इत्यादि बढ़ते हैं। बहुतसे लोग ऐसे देखे जाते हैं कि जिनकी आंखें बिल्डों की सी पीली होती हैं। उनकी आंखोंमें तेज धातुके साथ पित्त ऐसा विकार उत्पन्न करता है। यह रोग वंश परंपरासे भी देखा जाता है। माता पिता दोनोंकी आंखें पीली होनेपर बच्चोंकी भी आंखें पीली होती हैं; परंतु माता या पिता एककी आंखोंमें ऐसा विकार होने पर नहीं होती। यहां पर यह सवाल हो सकता है कि यूरोपमें सबकी आंखें सफेद क्यों होती है? इसका कारण यह है कि यूरोप सदा देश है और कफ सदीसे उत्पन्न होता है, इसलिये वहांके निवासियोंमें कफकी अधिकता रहती है। जब शरीरमें कफकी अधिकता होती है तो तेज धातुके साथ कफ दृष्टि-भागमें पहुँचता है, इस कारण यूरोप निवासियोंकी आंखें कंजी होती हैं। इस प्रकार तेजके साथ पित्तादि धातुओंके बिगाड़से अनेक प्रकारकी आंखें होती हैं।

( ५६ ) अल्पजीवी और दीर्घजीवी सन्तान कैसे होती है ?

यह एक बड़ा गंभीर विषय है। बहुतोंका तो कहना यह है कि यह वात ईश्वरके हाथमें है। बहुतसे लोग पूर्व जन्मके पाप और पुण्य पर मानते हैं, परंतु हम किसीके मन्तव्य पर आश्रय नहीं करते। हमने भी कई जगह ऐसा पढ़ा है कि आयु कर्मोंके अनुसार होती है, परंतु आजकालकी नवीन रीतिके अनुसार यह बात सिद्ध हुई है कि गर्भ रज-वीर्यके कीड़ोंसे