संतति शास्त्र
Santati Shastra
पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा
स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)
पृष्ठ 46, कुल 302 में से
संदर्भ में पढ़ेंगर्भाशयके रोग ।
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२. इतरा भेद—ममय पान्जर मुखका छोटा हो जाना ।
गर्भाशय के मुख पर तेजाव सरीखा कोई जलानेवाला पदार्थ लगाया जाना ।
२. गर्भाशय में सूजन या दूसरे रोगों का होता ।
३. योनि के अनेक रोगों से ।
४. गर्भाशय के मुखपर किसी प्रकार की चोट-श्रौजार या किसी दूसरी तरह से ।
५. किसी प्रकार का दाब गर्भाशय के मुख पर हो जाने से । ऐसी दशा में भी उपरोक्त लक्षण होने हैं । रोग बढ़ने पर दशा बहुत बिगड़ जाती है इसमें शीघ्र उपचार करता चाहिये ।
२. गर्भाशयकी सूजन ।
(क) “हनीमोंका मत”-गर्भाशय में चार प्रकार की सूजन होती है ( १ ) गर्भाशय की गरम सूजन ( २ ) ठंडी सूजन ( ३ ) दाढ़ी की कड़ी सूजन ( ४ ) बड़ी और फैली हुई सूजन ।
१. गर्भाशय की गरम सूजन—इसके कई कारण हैं ।
१. गर्भाशय पर चोट लगने से ।
२. किसी प्रकार गर्भाशय पर दबाव पहुंचने से ।
३. गरम औषधियों को गर्भाशय में लगाने से, जिनसे कि जलन पैदा हो ।
४. गरमी, सूजांकवाले पुरुषों के संयोग से ।
५. रजोयममें की रूकावट से ।
६. श्रुतिमैथुन से ।
७. गर्भ गिर जाने से ।
८. छोटी अवस्था में पहले ही पहल जवान पुरुष के साथ संयोग करने से कि जिसकी इन्द्रिय लम्बी हो । ( इस कारण गर्भाशयपर एक दम दबाव पड़ता है )