भारतकोश
संतति शास्त्र

संतति शास्त्र

Santati Shastra

पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा

स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)

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सन्तति-शास्त्र ।

  1. ३. संकामक रोगोंके संसर्गसे ।
  2. १. ऐसी दशामें अनेक लक्षण प्रगट होते हैं ।
  3. १. योनिसे दुर्गंधका आना ।
  4. २. एक प्रकारका गाढा पानी निकलना ।
  5. ३. पेड़के सामने अत्यन्त कठिन पीडा ।
  6. ४. कै और प्रायः दस्तोंका आना ।
  7. ५. घावके कारण समागममें पीडा होना ।
  8. ६. समयपर रजस्वला न होना ।
  9. ७. गर्भाशयके आगेका मुख सिक्कुड जाना ।
  10. ८. गर्भाशय और योनिमें दर्द, शोथ और दाहका होना ।
  11. ९. कभी कभी एक चारगी रज-स्त्राव हो जाना ।
  12. १०. घावमें खुजलाहट मालूम होना ।
  13. ११. मन्दाग्नि हो जाना और पेटका अफार ।
  14. १२. रज कम निकलना ।
  15. १३. रजका अत्यन्त पीडासे निकलना ।
  16. १४. रजका गर्भाशयमें जम जाना और कञ्जियत ।
  17. १५. गर्भाशयका दग्ध हो जाना ।
  18. १६. सूत्र बन्द हो जाना, या बूंद बूंद गिरना ।
  19. १७. गर्भाशय और उसके आस पास शोथ होना ।
  20. १८. जाँघ, पेड़, रीढ़, कमर, नाभी तंत्रों और सरमें दर्द होना ।
  21. १९. अण्ड और रजवाही नलियोंमें शोथ ।
  22. २०. गर्भाशयका नीचे उतर आना ।
  23. २१. पेटपर सूजन हो जाना ।

यह रोग पहले पहल गर्भाशयके मुखपर होता है, और बढ़ते तेबढ आस पास फैल जाता है । घाव जब फैलता है, तो