भारतकोश
संतति शास्त्र

संतति शास्त्र

Santati Shastra

पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा

स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)

Devanagarihipublished302 पृष्ठ

पृष्ठ 60, कुल 302 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 60

गर्भाशयके रोग ।

३६

११. गर्भाशयके मुखका बन्द हो जाना ।

इसके अनेक कारण हैं ।

१. गर्भाशयके मुखपर चोट लगनेसे उसमें सूजन आ जाती है । इस कारण दोनों किनारे चिपट जाते हैं और सूजन हलकी पड़ कर मुख मोटा पड़ जाता है तथा चिपका रहता है ।

२. गर्भाशयके मुखके दोनों किनारोंमें सवाद पड़कर आपसमें चिपट जानेसे ।

३. गर्भाशयके मुखपर चोट लगनेसे, जब कि सूजन आ जाने पेसी दशामें अनेक लक्षण होते हैं ।

१. पेड़का भारीपन और उसमें पीड़ा ।

२. हाथ, पाँच, पीठ और साथैलामें दर्द ।

३. गर्भाशयमें सफेद, चिकना और बहनेवाला पदार्थ भरा रहता जब कि गर्भाशयका मुख जन्मसे बन्द न हो ।

गर्भाशयका मुख दो प्रकारसे बन्द होता है । एक तो वह कि जो जन्मसे ही बन्द हो, दूसरा वह जो किसी रोग के होनेसे बन्द हो । जब रोगसे बन्द होता है तब गर्भाशयके मुखके आगे एक परदासा पड़ जाता है । पेसी दशामें रज नहीं निकलता ज्यों ज्यों रोग बढ़ता जाता है, कष्ट भी उसीके साथ बढ़ता जाता है । अधिक रज इकट्ठा हो जानेपर जरा जरासा गिरता है ।

१२. गर्भाशयका अर्बुद ।

इसके कई कारण हैं ।

१. जन्महीसे होना ।

२. जिस जगहसे गर्भाशय मुड़ जाना है वहाँ दवाब पड़नेके कारण पोषण न होनेसे ।