संतति शास्त्र
Santati Shastra
पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा
स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)
पृष्ठ 82, कुल 302 में से
संदर्भ में पढ़ेंरजो-धर्ममेंके रोग ।
६६
३. पेट्ट और कोयम भारतीयन ।
पेसी दशामें कष्ट होता है और नहीं भी होता । जिन स्त्रियोंमें रज कम होता है उनको कष्ट कम होता है; क्योंकि उनके तो रज ही कम है; परन्तु होते हुए न निकलनेसे बड़ी कठिनाई पड़ती है ।
३. कष्टरज
(१० क०)
१. रजका कष्टके साथ निकलना, यही कष्ट-रज है । इसके अनेक कारण हैं ।
१. अण्ड, फलवाहिनी नली और गर्भाशयमें विषाड । इससे, दूसरे रोग उत्पन्न हो जाना तथा किसी प्रकारकी रक्तावद ।
२. गर्भाशयके मुख और योनिमार्गमें शोथ इत्यादि ।
३. रजसे संबंध्य रसनेवाली नसाँ और रगों आदिकें किसी तरहका विकार ।
इसके अनेक लक्षण हैं ।
१. नामी और गर्भाशयके आसपास कठिन घावों के समान दर्द ।
२. काँखने और जोर देनेसे थोड़ासा रक्त निकलना ।
३. रक्त निकल जानेपर थोड़ी देरके लिये दर्द कम होकर फिर ज्योंका त्यों हो जाना ।
४. ऋतुके समयसे प्रायः आठ दिन पहले दर्दका प्रारम्भ होना ।
५. दर्दके साथ थोड़ा थोड़ासा खून निकलना ।
६. भ्रूवाशयमें जलन और दर्दका होना ।
७. नामीके नीचे दर्द और चोभसा मालूम होना ।