भारतकोश
संतति शास्त्र

संतति शास्त्र

Santati Shastra

पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा

स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)

Devanagarihipublished302 पृष्ठ

पृष्ठ 84, कुल 302 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 84

रजोधर्मके रोग ।

६३

  1. १. ऐसे रोगोंसे कि जिनसे शरीरका रक्त पतला पड़ जावे ।
  2. २. गर्भाशयमें उन नसांका मुग्न खुल जाना कि जिससे रक्त आता है । यह नीचे लिखे कारणोंसे होता है ।
    1. १. जब कि छोटे कदकी स्त्री पूरे जवानके साथ संयोग करे तो दवाव और चोटके कारण तन्म खुल जानी हैं ।
    2. २. पुरुषकी लिंगेन्द्रिय बड़ी होनेके कारण नसोंमें आघात पहुँचकर उनका खुल जाना ।
    3. ३. कम उम्रवाली स्त्रीका पूरे बड़े जवान पुरुषमें संयोग द्वारा नसोंमें आघात पहुँचकर खुल जाना ।
  3. ३. स्त्रुतमें किसी प्रकारकी खराबी होने से ।
  4. ४. तपेदिक और शुरदेके विकारों से ।
  5. ५. शरीरमें स्त्रुत बहुत घनने से (यह मोटी ताजी स्त्रिया-में होता है) ।
  6. ६. ऐसे रोग कि जिनसे स्त्रुतमें गरमी उत्पन्न हो ।
  7. ७. स्त्रुतका गरम हो जाना, जैसे कुछ रोगका स्त्रुत ।
  8. ८. पांडुरोगके होनेसे ।
  9. ९. गर्भाशयका मुँह चौड़ा हो जानेसे ।
  10. १०. गर्भाशयकी गरदन वा गर्भाशय में परिवर्तनसे ।
  11. ११. अतिमैथुनसे ।
  12. १२. फेफड़ेके अनेक रोगोंसे ।
  13. १३. रक्त पतला हो जानेसे ।
  14. १४. मसानेमें सृजन आ जानेसे ।
  15. १५. अरुडोंमें शोथ होनेसे ।
  16. १६. अरुडोंके पास कर्हायर शोथ होनेसे ।
संतति शास्त्र · पृष्ठ 84, कुल 302 में से · BharatKosha