संतति शास्त्र
Santati Shastra
पं० अयोध्याप्रसाद भार्गव द्वारा
स्रोत: Santati - Shastra · काशी, भार्गव पुस्तकालय (उद्गम)
पृष्ठ 94, कुल 302 में से
संदर्भ में पढ़ेंबन्ध्या रोग ।
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(५) गल्हगर्भा—उसको कहते हैं कि जिसके गर्भ रहकर गल्ह जावे और बढ़ न सके। इस विषयमें जाँच करने से मालूम हुआ है कि यह रोग गर्भाशयके विकार से होता है। खास कर उस स्त्री को कि जिसको 'सरतान रहम' अर्थात् गर्भाशय में कीड़े पैदा हो गए हों। 'सरतान रहमका' मत हकीमाका है अथवा उस स्त्री को होता है, जिस स्त्री की योनि अचरणा हो। अचरणा योनि उसको कहते हैं कि जिस में साफ न करने के कारण छोटे छोटे कीड़े पड़ गए हों और खुजली उत्पन्न होती हो। (च० चि० ३० ३७ श्लो० ११) ऐसे रोगी के होने पर गर्भाशय नष्ट होकर गर्भ गल्हकर गिर जाया करता है। इस रोग का दूसरा कारण गर्भाशयकी गर्मी है। गर्भाशय की बढ़ी हुई गर्मी गर्भ को गला देती है। तीसरा कारण अत्यन्त बढ़ा हुआ गर्मी और सूजाक का प्रकोप है कि जिस से बच्चे का रक्त विगड़ जाता है और गल्ह कर गिर पड़ता है। बड़े हुए कारणोंमें औषधि व्यर्थ होती है।
(६) कन्यापत्या—उसको कहते हैं कि जिस के कन्याएँ ही उत्पन्न हों। जाँच करने से मालूम हुआ है ऐसी स्त्रियाँ वही होती हैं कि जिनके दहिने और का अरुड नहीं होता या निकम्मा हो जाता है। क्यों कि स्त्री के दहिने अरुड से निकले हुए रज द्वारा पुत्र होता है। जब दहिना अरुड ही नहीं है तो पुत्र हो कैसे? अतएव ऐसी दशा में भी औषधि व्यर्थ है।
(७) भूठगर्भा—उसको कहते हैं कि गर्भ रह कर उस की बुद्धि न हो, वैसा ही रह जावे और दूसरा गर्भ भी न रहे। भूठगर्भ वह है कि जिस में बच्चे के स्थान में माँस का लोथड़ा हो। इसका कारण यह है कि जब