भारतकोश
सर्वदर्शनसंग्रह (षोडश दर्शन विमर्श - हिन्दी अनुवाद)

सर्वदर्शनसंग्रह (षोडश दर्शन विमर्श - हिन्दी अनुवाद)

Sarva-Darshana-Sangraha with Hindi Commentary

माधवाचार्य (विद्यारण्य स्वामी) / पं. उमाशंकर शर्मा ऋषि द्वारा

DevanagariHindipublished316 पृष्ठ

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दर्शनम् ] भाषाटीकासमेतः । ( १३५ ) मान न होनेसे कूटस्थ कहे जाते हैं । क्षर और अक्षर शब्दनिर्दिष्ट बद्ध और मुक्त जीवसे अन्य उत्तम पुरुष है जिसको परमात्मा कहते हैं । जो परमात्मा अचित् और बद्धमुक्तरूप लोकत्रयमे आत्मरूपसे प्रवेश करके भरणकरता है अतः वह अविनाशी और ईश्वर है उक्त स्वभाव होनेसे क्षरपदवाच्य पुरुष और अक्षर शब्दवाच्य मुक्तको भी मैंने अतिक्रमण किया इसीलिये लोक और वेदमें मैं पुरुषोत्तम शब्दसे प्रसिद्ध हूँ ॥ २४ ॥ यो मामेवमसम्मूढो जानाति पुरुषोत्तमम् । स सर्वविद्भजति मां सर्वभावेन भारत ॥ इति गुह्यतमं शास्त्रमिदमुक्तं मयानघ । एतद् बुद्ध्वा बुद्धिमान् स्यात् कृतकृत्यश्च भारत ॥” इति ॥ २५ ॥ जो मुझे उक्त प्रकारसे पुरुषोत्तम हे भारत ! जानता है यह भगवत् प्राप्तिके सम्पूर्ण उपायोंको जाननेवाला सब प्रकार मेरी भक्ति करता है । हे निष्पाप ! इस प्रकार पर- मपुरुषोत्तमतत्त्व प्रतिपादक अतिगुह्यतम शास्त्र मैंने तुमसे कहा इसको जानकर जीव ज्ञानी और कृतकृत्य होते हैं ॥ २५ ॥ महावराहेऽपि- “मुख्यञ्च सर्ववेदानां तात्पर्य्यं श्रीपतौ परे । उत्कर्षे तु तदन्यत्र तात्पर्य्यं स्यादवान्तरम् ॥” इति ॥ २६ ॥ वाराहपुराणमेंभी कहा है सम्पूर्ण वेदोंका श्रीहरिके परम उत्कर्षबोधनमें मुख्य तात्पर्य है और अन्यत्र गौण तात्पर्य है ॥ २६ ॥ युक्तं च विष्णोः सर्वोत्कर्षे महातात्पर्य्यम् । मोक्षो हि सर्वपुरुषा- र्थोत्तमः धर्मार्थकामास्त्वनित्याः । मोक्ष एव नित्यः । ' तस्मा- न्नित्यं तदर्थाय यतेत मतिमान्नरः' इति भाल्लवेयश्रुते । मोक्षश्च विष्णुप्रसादमन्तरेण न लभ्यते । 'यस्य प्रसादात् परमा यत्स्व- रूपात् संसारान्मुच्यते नावरेसुरा नाराधयन्तोऽसौ परमो विचि- न्त्यो मुमुक्षुभिः कर्मपाशादमुष्मात् ' इति नारायणश्रुते । “तस्मिन् प्रसन्ने किमिहास्त्यलभ्यं सर्वार्थकामैरलमल्पकारते । समाश्रिताद्ब्रह्मतरोरनन्तान्निःसंशयं मुक्तिफलं प्रयाति ॥” इति विष्णुपुराणोक्तेश्च ॥ २७ ॥ विष्णुके विषयमें सर्वोत्कर्षबोधन युक्तभी है क्योंकि सम्पूर्ण पुरुषार्थोंमें मोक्षही उत्तम पुरुषार्थ है धर्म अर्थ काम अनित्य हैं केवल मोक्षही नित्य है इस मोक्षके-