भारतकोश
सर्वदर्शनसंग्रह (षोडश दर्शन विमर्श - हिन्दी अनुवाद)

सर्वदर्शनसंग्रह (षोडश दर्शन विमर्श - हिन्दी अनुवाद)

Sarva-Darshana-Sangraha with Hindi Commentary

माधवाचार्य (विद्यारण्य स्वामी) / पं. उमाशंकर शर्मा ऋषि द्वारा

DevanagariHindipublished316 पृष्ठ

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दर्शनम् । भाषाटीकासमेतः । ( १६३ ) ननु दर्शनान्तरेऽपीश्वरज्ञानान्मोक्षो लभ्यत एवेति कुतोऽस्य विशेष इति चेन्मैवं वादीः विकल्पानुपपत्तेः । किमीश्वरविषय- ज्ञानमात्रं निर्वाणकारणं किंवा साक्षात्कारः, अथवा यथावत्त- त्त्वनिश्चय । नाद्य - शास्त्रमन्तरेणापि प्राकृतजनवद्देवाना मधिपो महादेव इति ज्ञानोत्पत्तिमात्रेण मोक्षसिद्धौ शास्त्राभ्यासवैफल्य- प्रसङ्गात् । नापि द्वितीय.--अनेकमलप्रचयोपचितानां पिशि- तलोचनानां पशूना परमेश्वरसाक्षात्कारानुपपत्ते । तृतीयेऽस्म- न्मतापात पाशुपतशास्त्रमन्तरेण यथावत्तत्त्वनिश्चयानुपपत्तेः । तदुक्तमाचार्य्यै - ज्ञानमात्रे यथा शास्त्रं साक्षाद्दृष्टिस्तु दुर्लभा । पञ्चार्थादन्यतो नास्ति यथावत्तत्त्वनिश्चयः ॥” इति । तस्मात् पुरुषार्थकाम- पुरुषधौरेयैः पञ्चार्थप्रतिपादनपरं पाशुपतशास्त्र- माश्रयणीयम् ॥ १६ ॥ इति सर्वदर्शनसंग्रहे नकुलीशपाशुपतदर्शनं समाप्तम् ॥ ६ ॥ जब दर्शनान्तरमें भी ईश्वरज्ञानसे मोक्ष प्रतिपादन किया है तब यहाँ क्या विशेष है जिससे इतना श्रम उठाते हो सुनो. क्या ईश्वरविषय ज्ञानमात्रसे मोक्ष है, किंवा प्रत्यक्षसे, अथवा यथावत्तत्त्व निश्चयसे मोक्ष है ? शास्त्राभ्यासके विनाभी पामरोंके समान महादेव देवोंकेभी देव है इत्यादि ज्ञानमात्रसे मोक्ष होजाय तो शास्त्राभ्यास व्यर्थ होगा अत प्रथम पक्ष अयुक्त हे। द्वितीयमेंभी अनेक पापसे युक्त चर्मचक्षुओंको ईश्वर साक्षात्कार असम्भव हे तृतीय पक्षमें पाशुपत मतम प्रवेश अवश्यही होगा पाशुपतशास्त्रके बिना यथावत् तत्त्वनिश्चय अनुपपन्न हे अतएव कहा है ज्ञान- मात्रपक्षमें शास्त्र व्यर्थ होगा साक्षात्कार ( प्रत्यक्ष ) दुर्लभ है पञ्चार्थ प्रतिपादक पाशुपतशास्त्रके बिना तत्त्वनिश्चयभी नहीं होगा अतः पुरुषार्थ चाहनेवाले श्रेष्ठ पुरुष पञ्चार्थ प्रतिपादक पाशुपतशास्त्रका आश्रयण करें ॥ १६ ॥ सर्वदर्शनसंग्रहमें नकुलीशपाशुपतदर्शन समाप्त ।