भारतकोश
सर्वदर्शनसंग्रह (षोडश दर्शन विमर्श - हिन्दी अनुवाद)

सर्वदर्शनसंग्रह (षोडश दर्शन विमर्श - हिन्दी अनुवाद)

Sarva-Darshana-Sangraha with Hindi Commentary

माधवाचार्य (विद्यारण्य स्वामी) / पं. उमाशंकर शर्मा ऋषि द्वारा

DevanagariHindipublished316 पृष्ठ

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दर्शनम् ] भाषाटीकासंमत' । ( १३९ ) अभावस्तु निषेधमुखप्रमाणगम्यः सप्तमो निरूप्यते । स चास- मवायवत्त्वे सत्यसमवायः संक्षेपतो द्विविधः संसर्गाभावान्योन्या- भावभेदात् । संसर्गाभावोऽपि त्रिविधः प्राक्प्रध्वंसात्यन्ता- भावभेदात् । तत्रानित्यो अनादितमः प्रागभावः उत्पत्तिमान् । अविनाशी प्रध्वंसः प्रतियोग्याश्रयोऽभावोत्यन्ताभावः अत्य- न्ताभावव्यतिरिक्तत्वे सत्यनवधिरभावोऽन्योन्याभाव ॥ २१ ॥ अभाव निषेध प्रमाण वोध्य है समवाय और समवायवान् दोनामे भिन्न अभाव है वह संक्षेपत संसर्गाभाव अन्योन्याभाव भेदमे दो प्रकार है । प्रागभाव प्रध्वंसाभाव अत्यन्ताभाव भेदसे प्रथम तीन प्रकार है अनित्य तथा विनाशी प्रागभाव, उत्पत्ति- मान्, अविनाशी प्रध्वंसाभाव प्रतियोगीकी अपेक्षासङ्कृत अभाव अत्यन्ताभाव है अत्यन्ताभावसे भिन्न अनवधि अभाव अन्योन्याभाव है ॥ २१ ॥ नन्वन्योन्याभाव एवात्यंताभाव इति चेत् अहो राजमार्ग एव भ्रमः । अन्योन्याभावो हि तादात्म्यप्रतियोगिकः प्रतिषेधः यथा घटः पटात्मा न भवतीति संसर्गप्रतियोगिक प्रतिषेधोऽ- त्यन्ताभावः यथा वायौ रूपसम्बन्धो नास्तीति । न चास्य पुरुषार्थोपयिकत्व नास्तीत्याशङ्कनीयं दुःखायन्तोच्छेदापरप- र्यायनि श्रेयसरूपत्वेन परमपुरुषार्थत्वात् ॥ २२ ॥ इति सर्वदर्शनसंग्रहे औलूक्यदर्शनं समाप्तम् ॥ १० ॥ शंका—अन्योन्याभावहीको अत्यन्ताभाव क्यो नही माना जाय ? उत्तर—यह स्फुटत् प्रकाश विस्तृत राजमार्गमेंभी भ्रमके समान है ? अन्योन्याभाव तादात्म्यसम्बन्ध प्रतियोगिक अभाव है यथा घट पट नहीं यहा पर तादात्म्यसे पटमें घट नहीं अर्थात् पटत्वरूपसे पटम घट नही ससर्ग ( सम्बन्ध ) प्रतियोगिक निषेध अत्यन्ताभाव है यथा वायुमें रूप नहीं अर्थात् वायु रूपसम्बन्धी नहीं है वैशेषिकशास्त्रको मांक्षानुप- योगीमी नहीं कह सकते दु खके अत्यन्तनिवृत्तिरूप मोक्षका प्रयोजक है यह शास्त्र है ॥ २२ ॥ इति सर्वदर्शनसग्रहमे वैशेषिकदर्शन समाप्त ।