भारतकोश
सर्वदर्शनसंग्रह (षोडश दर्शन विमर्श - हिन्दी अनुवाद)

सर्वदर्शनसंग्रह (षोडश दर्शन विमर्श - हिन्दी अनुवाद)

Sarva-Darshana-Sangraha with Hindi Commentary

माधवाचार्य (विद्यारण्य स्वामी) / पं. उमाशंकर शर्मा ऋषि द्वारा

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दर्शनम् ] भाषाटीकासमेतः । (२०१) मानाधीना मेयसिद्धिरिति न्यायेन प्रमाणस्य प्रथममुद्देशे तद- नुसारेण लक्षणस्य कथनीयतया प्रथमोद्दिष्टस्य प्रमाणस्य प्रथमं लक्षणं कथ्यते ॥ साधनाश्रयाव्यतिरिक्तत्वे सति प्रमा- व्याप्तं प्रमाणम् । एवञ्च प्रतितन्त्रसिद्धान्तमिह परमेश्वरप्रा- माण्यं संगृहीतं भवति । यदकथयत् सूत्रकारः ‘मन्त्रायुर्वेद- प्रामाण्यवच्च तत्प्रामाण्यमाप्तप्रामाण्यात्’ इति ॥ तथाच न्यायपारावारपारदृश्वा विश्वविख्यातकीर्त्तिरुदयनाचार्योऽपि कुसुमाञ्जलौ चतुर्थस्तबके- “मितिः सम्यक्परिच्छित्तिस्त- द्वत्ता च प्रमातृत्ता । तद्योगव्यवच्छेदः प्रामाण्यं गातमे मते ॥” इति ॥ “साक्षात्कारिणि नित्ययोगिनि परद्वारान- पेक्षस्थितौ भूतार्थानुभवे निविष्टनिखिलप्रस्ताविवस्तुक्रमः । लेशाद्दष्टिनिमित्तदुष्टिविगमप्रभ्रष्टशङ्कातुप शङ्कोन्मेषकल- ङ्किभिः किमपरैस्तन्मे प्रमाणं शिव ॥” इति ॥ २ ॥ प्रमाणके आधीन प्रमेयकी सिद्धि होनेसे उद्देशमें प्रथम प्रमाणका उपादान किया है अतः उद्देशके अनुगुण लक्षणका कथन उचित होनेके कारण प्रथम प्रमा- णका लक्षण कहते हैं (साधनाश्रय इत्यादि) प्रमाणस्य प्रथम लक्षणं कथ्यते इति प्रमाणका साधन और प्रमाके आश्रय इन दोनोंसे अभिन्न होकर जो प्रमामें नित्य सम्बद्ध हो वह प्रमाण है ईश्वरभी प्रमामें नित्य सम्बद्ध होनेके कारण प्रमाण है जीव प्रमासे नित्य सम्बद्ध न होनेसे प्रमाण न हुआ एतादृश लक्षण करनेसे नैया- यिकसिद्धान्तसिद्ध ईश्वर प्रामाण्यभी उपपन्न हो गया । जिस प्रकार मन्त्र आयुर्वेदा- दिक आप्तके उच्चरित होनेसे प्रमाण है तिसी प्रकार ईश्वर आप्ततम होनेसे स्वतः प्रमाण है उक्त प्रमाणलक्षणम उदयनाचार्यकी सम्मति कहते हैं (तथाचेति) मिति सम्यक्ज्ञान है सम्यक ज्ञानवत्त्व प्रमातृत्व है तादृश प्रमातृत्वका नित्य सम्बन्ध गौतमके मतमें प्रमाण है साक्षात्कारविषय नित्य सम्बद्ध इतरके निरपेक्ष सिद्ध वस्तुके अनुभवमें निविष्ट हैं समस्तकवस्तु निसमें सर्वात्मना दर्शनसे नष्ट हे शङ्कारूप कलङ्क जिनके एवम्भूत शिवही प्रमाण हे ॥ २ ॥ तच्चतुर्विधं प्रत्यक्षानुमानोपमानशब्दभेदात् । प्रमेयं द्वादशप्र- कारम्, आत्मशरीरेन्द्रियार्थबुद्धिमनःप्रवृत्तिदोषप्रेत्यभावफल-