भारतकोश
सर्वदर्शनसंग्रह (षोडश दर्शन विमर्श - हिन्दी अनुवाद)

सर्वदर्शनसंग्रह (षोडश दर्शन विमर्श - हिन्दी अनुवाद)

Sarva-Darshana-Sangraha with Hindi Commentary

माधवाचार्य (विद्यारण्य स्वामी) / पं. उमाशंकर शर्मा ऋषि द्वारा

DevanagariHindipublished316 पृष्ठ

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दर्शनम् ] भाषाटीकासमेत । ( २०३ ) यथार्थानुभवपर्याया प्रमितिर्निर्णयः । स चतुर्विध साक्षात्कृत्यनु- मित्यपमितिशाब्दभेदात् ॥ तत्त्वनिर्णयफलः कथाविशेषो वादः ॥ उभयसाधनवती विजिगीषुकथा जल्पः ॥ स्वपक्षस्थापनाहीनः कथाविशेषो वितण्डा ॥ कथा नाम वादिप्रतिवादिनो पक्षप्रति- पक्षपरिग्रहः ॥ असाधको हेतुत्वेनाभिमतो हेत्वाभास । स पञ्च- विधः सव्यभिचारविरुद्धप्रकरणसमातीतकालभेदात् ॥ ६ ॥ यथार्थानुभवके पर्याय प्रमा निर्णय है । वह प्रत्यक्ष अनुमान, उपमान, और शब्दभेदसे चार प्रकार है । तत्त्वनिर्णयके लिये जो विचार है वह वाद है । दोनो पक्ष समर्थन करनेवाले विजिगीषुओंके विचारनेका नाम जल्प है । स्वपक्ष- स्थापन शून्य परपक्षखण्डन रूप कथा वितण्डा है । वादी और प्रतिवादी दोनोंके परस्पर पक्ष प्रतिपक्ष स्वीकारके नाम कथा है । साध्यका असाधक हो हेतुके समान भासमान है वह हेत्वाभास है। वह सव्यभिचार, विरुद्ध, प्रकरण, सम और काला- त्यय भेदसे पाँच प्रकार है ॥ ६ ॥ शब्दवृत्तिव्यत्ययेन प्रतिषेधहेतुश्छलम् । तत्रिविधमभिधानता- त्पर्योपचारवृत्तिव्यत्ययभेदात् ॥ स्वव्याघातकमुत्तरं जातिः सा चतुर्विंशतिविधा । साधर्म्यवैधर्म्योत्कर्षापकर्षवर्ण्यावर्ण्यविक- ल्पसाध्यप्राप्त्यप्राप्तिप्रसङ्गप्रतिदृष्टान्तानुत्पत्तिसंशयप्रकरणाहे- त्वर्थापत्तिविशेषापत्युपलब्ध्यनुपलब्धिनित्यानित्यकार्य्यसम- भेदात् ॥ ७ ॥ शब्द वृत्ति ( शक्तिको ) व्यत्यास करके प्रतिषेध हेतु छल है वह अभिधानवृत्ति- व्यत्यय, तात्पर्य्यवृत्तिव्यत्यय और लक्षणोवृत्तिव्यत्ययभेदसे तीन प्रकार है । स्वपक्षका विघातक उत्तर जाति है वह साधर्म्य १ वैधर्म्य २ उत्कर्ष ३ अपकर्ष ४ वर्ण्य ५ अवर्ण्य ६ विकल्प ७ साध्य ८ प्राप्ति ९ अप्राप्ति १० प्रसङ्ग ११ प्रति- १ जैसे किसीके नूतन कम्बलके तात्पर्य्यमे 'नवकम्बलो देवदत्त ' ऐसा उच्चारण किया तहापर नवशब्दके नूतन अर्थमें जो शक्ति है उसको हटाकर नौसंख्यामें वृत्ति मानकर 'कथ नवकम्बलो देवदत्त एक एव कम्बल ' अर्थात् ९ कम्बल कहा है एकही कम्बल है ऐसा कहना सर्व शब्दके वृत्तिके व्यत्यासरूप कहा है ।