सर्वदर्शनसंग्रह (षोडश दर्शन विमर्श - हिन्दी अनुवाद)
Sarva-Darshana-Sangraha with Hindi Commentary
माधवाचार्य (विद्यारण्य स्वामी) / पं. उमाशंकर शर्मा ऋषि द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंदर्शनम् ] भाषाटीकासमेतः । (७) मानस प्रत्यक्ष भी नहीं कह सकते अन्तःकरण स्वतन्त्ररूपसे बाह्यार्थका ज्ञान नहीं कर सकता किन्तु चक्षुरादि परतन्त्र ही करता है यथा मनको चक्षुरादिका संयोग और चक्षुरादिको विषयका संयोग होनेपर प्रत्यक्ष होता है ऐसा नियम है “चक्षुरादिके विषयको ग्रहण करनेमें मन चक्षुरादि परतन्त्र ही प्रवृत्त होते हैं।” ऐसा कहा भी है ॥१३॥ ( नाप्यनुमानं व्याप्तिज्ञानोपायः, तत्र तत्राप्येवमिति अनव- स्थादौस्थ्यप्रसङ्गात् । नापि शब्दस्तदुपायः, काणादमतानुसारे- णानुमान एवान्तर्भावात् अनन्तर्भावे वा वृद्धव्यवहाररूपलिङ्गाव- गतिः सापेक्षतया प्रागुक्तदूषणलङ्घनाज्झालत्वात् ॥ १४॥ अनुमान भी व्याप्तिज्ञानका उपाय नहीं हो सकता एक व्याप्तिज्ञानके लिये अनु- मान करे तो उसमें भी व्याप्तिज्ञानकी अपेक्षा, उसके लिये अनुमानान्तर, उसके लिये पुनः व्याप्तिज्ञानापेक्षा, एवं क्रमसे अनवस्था होगी । शब्द भी व्याप्तिज्ञानका उपाय नहीं क्योंकि वैशेषिकके मतमें शब्द भी अनुमानमें अन्तर्भूत है अत एव- "शब्दोपमानयोर्नैव पृथक् प्रामाण्यमर्हति । अनुमाने गतार्थत्वादिति वैशेषिक मतम् ॥” इत्यादि वैशेषिकोंने कहा भी है। शब्दको अनुमानमे अन्तर्भाव न माननेपर भी वृद्ध व्यवहाररूप लिङ्गसापेक्ष होनेसे पूर्वोक्त अनवस्था तदवस्थ होगी। यथा एक वृद्ध 'गौ को लावो' ऐसा किसी भृत्यसे कहते हैं उसको सुनकर भृत्य गौको लाता है उसको देखकर समीपस्थ बालकको शक्तिग्रह होता है यह शब्दकी शक्तिग्रहका क्रम है ॥ १४ ॥ धूमधूमध्वजयोरविनाभावोऽस्तीति वचनमात्रे मन्वादिवद् विश्वासाभावाच्च ।' अनुपदिष्टविनाभावस्य पुरुषस्यार्थान्तरदर्श- नेनार्थान्तरानुमित्यभावे स्वार्थानुमानकथायाः कथाशेषत्व- प्रसङ्गाच्च ॥ १५ ॥ केवल अग्निके विना धूम नहीं रहता यह वचन मनुवचनके समान विश्वासास्पद भी नहीं होगा । धूम अग्निके अविनाभूत अर्थात् अग्निकी सत्ताके विना धूमकी सत्ता नहीं रहती है इसी प्रकार जिस पुरुषको उपदेश नहीं हुआ हो उस पुरुषको धूमको देख- कर अग्नि आदि अर्थान्तरका अनुमान भी असम्भव है एव स्वार्थानुमानका अञ्जलि प्रदान हो जायगा । तात्पर्य-अनुमान स्वार्थपरार्थ भेदसे दो प्रकार है। स्वय यदि धूमकी व्याप्ति ग्रहणकर पश्चात् धूम देखकर व्याप्ति स्मरणपूर्वक पर्वतमें वह्निका अनुमान करतो