सर्वदर्शनसंग्रह (षोडश दर्शन विमर्श - हिन्दी अनुवाद)
Sarva-Darshana-Sangraha with Hindi Commentary
माधवाचार्य (विद्यारण्य स्वामी) / पं. उमाशंकर शर्मा ऋषि द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें(८) सर्वदर्शनसङ्ग्रहः। [ चार्वाक- है वह स्वार्थानुमान है जिसने स्वयं व्याप्तिग्रहण किया हो उसको बोध करानेके लिय पञ्चावयव वाक्यका प्रयोग करता हो वह परार्थानुमान है प्रकृतेमे स्वयं व्याप्ति-ग्रह न करनेसे स्वार्थानुमान परकीय वाक्यम विश्वास न होनेसे परार्थानुमान दोनों दूरत. परास्त हो गये ॥ १५ ॥ उपमानादिकं तु दूरापास्तं तेषां संज्ञासंज्ञिसम्बन्धादिबोधक- त्वेनानौपाधिकत्वसम्बन्धबोधकत्वासम्भवात् ॥ १६ ॥ उपमान भी व्याप्तिग्रहका उपाय नहीं हो सकता क्योंकि संज्ञा संज्ञि भाव सम्बन्ध को उपमान कहते हैं यथा गौके सदृश गवय है इस वाक्यको सुनकर वनम तादृश जन्तुको देखनेसे यह गवय है ऐसा उपमान होता है गवयपद संज्ञा तादृश वस्तु संज्ञी दोनोंकी शक्ति सम्बन्ध है-परन्तु यह भी निरुपाधिक सम्बन्ध बाधनमें असमर्थ है॥१६॥ किञ्च उपाध्यभावोऽपि दुरवगम उपाधीनां प्रत्यक्षत्वनियमा- सम्भवेन प्रत्यक्षाणामभावस्य प्रत्यक्षत्वेऽपि अप्रत्यक्षाणामभाव स्याप्रत्यक्षतया अनुमानाद्यपेक्षायामुक्तदूषणानिवृत्तेः ॥१७॥ उपाधिका अभाव भी दुर्ज्ञेय है-क्योंकि पूर्वोक्त प्रकार समस्त उपाधिका प्रत्यक्ष सम्भव न होनेसे, अभाव प्रत्यक्षके प्रतियोगि प्रत्यक्ष कारण है, विद्यमान उपाधिके अभावका प्रत्यक्ष होनेपर भी अतीत अनागत और वर्तमान भी अप्रत्यक्ष उपाधिके अभावका प्रत्यक्ष सम्भव नहीं है अतः तादृश अभावप्रत्यक्षके लिये अनुमानकी अपेक्षा करें तो उसमें भी व्याप्ति ज्ञानकी अपेक्षा होगी उसके लिए उपाध्यभाव ज्ञानकी अपेक्षा एवं क्रमसे अनवस्था तदवस्थ होगी ॥ १७ ॥ अपि च=साधनाव्यापकत्वे सति साध्यसमव्याप्तिरिति तल्लक्षण मङ्गीकर्त्तव्यम् । तदुक्तम्- "अव्याप्तसाधनो यः साध्यसमव्याप्ति- रुच्यते स उपाधिः" इति ॥ शब्देऽनित्यत्वे साध्ये सकर्तृकत्व घटत्वमश्रावणताञ्च व्यावर्तयितुमुपात्तान्यत्र क्रमतो विशेषणानि त्रीणि ॥ १८ ॥ उपाधि लक्षणमे भी व्याप्तिज्ञानापेक्षा कहते हैं "अपिचेति" साधनाव्यापकत्वेति इसमें तीन पद हैं साधनाव्यापकत्व १-साध्य २-सम ३-तीनोंका प्रयोजन- "शब्दो ऽनित्यः कृतकत्वात्"-यह सद्धेतु है । यदि साधनाव्यापकत्व नहीं कहता तो सकर्तृकत्व हो जायगा साधनाव्यापकत्व कहा तो सकर्तृकत्व-कार्यत्वका अव्यापक न हुआ। जहां कार्यत्व है वहां सर्वत्र सकर्तृकत्व है अतः उसमें अतिव्याप्ति वारणके लिए,,