भारतकोश
सर्वदर्शनसंग्रह (षोडश दर्शन विमर्श - हिन्दी अनुवाद)

सर्वदर्शनसंग्रह (षोडश दर्शन विमर्श - हिन्दी अनुवाद)

Sarva-Darshana-Sangraha with Hindi Commentary

माधवाचार्य (विद्यारण्य स्वामी) / पं. उमाशंकर शर्मा ऋषि द्वारा

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( २४६ ) सर्वदर्शनसंग्रहः। [ पाणिनि-

वगतेः सर्वजनीनत्वान्न ह्यसति बाधके पदानुभव शक्यो मिथ्येति वक्तुं पदार्थप्रतीत्यन्यथानुपपत्त्यापि स्फोटोऽभ्युपग- न्तव्यः । न च वर्णेभ्य एव तत्प्रत्यय प्रादुर्भवतीति परीक्षा- क्षमं विकल्पासहत्वात् ॥ १८ ॥ आप स्फोटात्मक शब्दको नित्य कहते हैं। परन्तु उसम प्रमाण न होनेसे अमान्य है इसपर कहते हैं । जनेक वर्ण समुदितमें वर्णसे अतिरिक्त एक पदम् इत्यादि व्यवहारही शब्दनित्यत्वमें प्रत्यक्ष प्रमाण है। जबतक बाधक न हो तबतक पद प्रत्यक्षको मिथ्या नहीं कहसकते । अर्थप्रतीतिबलसेभी स्फोट पदार्थ मानना होगा । वर्णहीसे अर्थप्रतीति होती है ऐसा माननाभी विकल्प दोष दूषित है ॥ १८ ॥ किं समस्ता व्यस्ता वा अर्थप्रत्ययं जनयन्ति । नाद्य वर्णाना क्षणिकानां समूहसम्भवात् । नान्त्यः व्यस्तवर्णेभ्योऽर्थप्रत्य- यासम्भवात् । न च व्याससमासाभ्यामन्य प्रकार सम- स्तीति । तस्माद्वर्णानां वाचकत्वानुपपत्तौ यद्वलादर्थप्रतिपत्ति- स स्फोट इति वर्णातिरिक्तो वर्णाभिव्यङ्गोऽर्थप्रत्यायको नित्य शब्द स्फोट इति तद्विदो वदन्ति । अतएव स्फुट्यते व्यज्यते वर्णैरिति स्फोटो वर्णाभिव्यङ्ग्य स्फुटीभवत्यस्मादर्थ इति स्फोटोऽर्थप्रत्यायक इति स्फोटशब्दार्थमुभयथा निराहुः ॥ १९ ॥ तथाहि क्या वर्ण समुदाय अर्थबोधक है, या प्रत्येक अर्थका बोधक है ? वर्ण क्षणिक होनेसे उत्तरोत्तरवर्णोत्पत्तिकालमें पूर्व पूर्व वर्ण नष्ट होनेके कारण समुदा- यका असम्भव है प्रत्येक पक्षमे प्रत्येक वर्णसे अर्थप्रतीति नही होती। एव द्वितीयादि वर्णोच्चारण वैय्यर्थभी होगा प्रत्येक ओर समुदाय छोडकर तीसरा उपायही नहीं है । उभयथापि वर्णोंका वाचकत्व असम्भव है अत जिससे अर्थप्रतीति होती हो वह वर्णसे अतिरिक्त वर्णसे अभिव्यङ्ग्य नित्यशब्द स्फोट है । वर्णोंसे जो स्फुटित (प्रकाशित) हो अथवा अर्थ जिससे स्फुट हो वह स्फोट है ॥ १९ ॥ तथाचोक्तं भगवता पतञ्जलिना महाभाष्ये 'अथ गौरित्यत्र क शब्दो येनोच्चारितेन सास्नालाङ्गूलककुदखुरविषाणिना सम्-