भारतकोश
सर्वदर्शनसंग्रह (षोडश दर्शन विमर्श - हिन्दी अनुवाद)

सर्वदर्शनसंग्रह (षोडश दर्शन विमर्श - हिन्दी अनुवाद)

Sarva-Darshana-Sangraha with Hindi Commentary

माधवाचार्य (विद्यारण्य स्वामी) / पं. उमाशंकर शर्मा ऋषि द्वारा

DevanagariHindipublished316 पृष्ठ

पृष्ठ 62, कुल 316 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 62

दर्शनम् ]। भाषाटीकासमेत। ( ५३ ) दूषणान्तर ( किञ्चेति ) अर्थ ( घटादि ) से उत्पन्न ज्ञान जिस प्रकार नीलादि ( घटादि ) आकारका अनुकरण करेगा । अर्थात् जिस प्रकार विषयाकार ज्ञानमें अर्पित होता है । उसी प्रकार घटादि विषय वृत्ति जडताका भी अनुकरण करेगा तो विषयके समान ज्ञानभी जड होने लगेगा, इष्टापत्ति कह नहीं सकते क्योंकि ज्ञानका प्रकाशरूपत्व सर्वसम्मत है जड होगा तो घटादिवत् ज्ञान भी स्वयं प्रकाश नहीं रहेगा । तब तो सूदके लालचसे दीवालियाके पास रुपये जमा करनेसे जिस प्रकार मूलका भी नाश हो जाता है उसी प्रकार विषयका अनुकरण करने ज्ञानका स्वयंप्रकाशरूप स्वरूपभी नष्ट होजायगा ॥ ८ ॥ अथैतद्दोषपरिजिहीर्षया ज्ञानं जडतां नानुकरोतीति ब्रूषे हन्त तर्हि तस्याग्रहणं न स्यादित्येकमनुसन्धित्सतोऽपरं प्रच्यवत इति न्यायापातः । ननु माभूत् जडताया ग्रहणं कि न छिन्नं तद्ग्रहणेऽपि नीलाकारग्रहणे तयोर्भेदा नैकान्तो वा भवेत् । नीलाकारग्रहणे चागृहिता जडता कथं तस्यानुरूपं स्यात् अपरथा गृहीतस्य स्तम्भस्यागृहीत त्रैलोक्यमपि रूपं भवेत् । तदेतत् प्रमेयजात प्रतापचन्द्रप्रभृतिभिरर्हन्मतानुसारिभि प्रमे- यकमलमार्त्तण्डादौ प्रबन्धे प्रपञ्चितमिति ग्रन्थभूयस्त्वभयात्रो- पन्यस्तम् ॥ ९ ॥ ( अथेति ) इस दोषसे छूटनेके लिये यदि कहो ज्ञान जडताका अनुकरण नहीं करेगा वि तो जडताका ग्रहण भी नहीं होगा अर्थात् 'घटो जड' ऐसा ज्ञान होता रहा सो अब नहीं होगा इस प्रकार एककी रक्षा करनेपर दूसरा नष्ट होजायगा अर्थात् ज्ञान जडाकारताका अनुकरण करे तो स्वयंप्रकाशक नष्ट होगा यदि न अनुकरण करे तो विषयकी जडत्व प्रतीति न होगी । ( ननु इति ) जडताका ग्रहण न होनेपर भी घटका ग्रहण होनेसे घटाकार ओर जडताका अत्यन्त अभेद अर्थात् व्यभिचार न होनेसे जडताका भी ग्रहण हो जायगा यह कहना भी असंगत हे क्योंकि नीला- कारके ग्रहणसे अगृहीत जडताका ग्रहण कैसा होसकेगा, यदि ग्रहण होता हो तो घट जड हे ऐसा कहनेपर घटसे जन्य जड है ऐसी प्रतीति होने लगेगी क्योकि घटा- कार गृहीत होनेसे ज्ञानरूप होगा, जटाकार अगृहीत होनेमे उससे भिन्न होगा ( अपरथेति ) अगृहीत भी गृहीतका स्वरूप होगा तो जब स्तम्भ इत्यादि खमका