सात्वत संहिता (पाञ्चरात्र आगम - भगवान् सङ्कर्षण-नारद संवाद सान्वय सटीक)
Satvata Samhita of Pancharatra Agama with Commentary
भगवान् सङ्कर्षण / महर्षि नारद द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२२८ सात्वतसंहिता परिवाराणां बीजपिण्डयोरनुक्तत्वात् तत्तन्नामाद्याक्षरमेवानुस्वारान्वितं कृत्वा तत्तत्संज्ञामन्त्रैर्योज्यमित्याह—अभिधानेति सार्धेन । अरान्ताद्येन पूर्वोक्तवर्णचक्रे, अरान्तो विसर्गः, तदाद्येन अनुस्वारेणेत्यर्थः ॥ १३६ ॥ ॥ इति श्रीमौज्यायनकुलतिलकस्य यदुगिरीश्वरचरणकमलार्चकस्य योगानन्दभट्टाचार्यस्य तनयेन अलशिङ्गभट्टेन विरचिते सात्वततन्त्रभाष्ये नवमः परिच्छेदः ॥ ९ ॥ — 𑁍 — यहाँ परिवारों का बीज पिण्ड नहीं कहा गया है । अतः उनके नाम के आदि अक्षर को ही अनुस्वार से युक्त कर पूर्वोद्दिष्ट मार्ग से संज्ञा मन्त्रों में जोड़ देना चाहिये । इस प्रकार विभवदेवतान्तर्याग के इस क्रम में सभी देवताओं की पूजा के लिये यह प्रकाशित किया गया है ॥ १३६ ॥ ॥ इस प्रकार डॉ० सुधाकर मालवीय कृत सात्त्वत संहिता के विभवदेवतान्तर्याग नामक नवम परिच्छेद की हिन्दी समाप्त हुई ॥ ९ ॥ — 𑁍 —