भारतकोश
सात्वत संहिता (पाञ्चरात्र आगम - भगवान् सङ्कर्षण-नारद संवाद सान्वय सटीक)

सात्वत संहिता (पाञ्चरात्र आगम - भगवान् सङ्कर्षण-नारद संवाद सान्वय सटीक)

Satvata Samhita of Pancharatra Agama with Commentary

भगवान् सङ्कर्षण / महर्षि नारद द्वारा

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पृष्ठ 329

२७० सात्वतसंहिता एकार्णवे तु त्रैलोक्ये ब्रह्मा नारायणात्मकः। भोगिशय्यागतः शेते त्रैलोक्यग्रासबृंहितः॥ (१।३।२४) इति ब्रह्मण एवैकार्णवशायित्वं प्रतिपादितमिति चेन्न, यतो ब्रह्मणोऽप्याधारभूतो- ऽयमर्णवशाय्यवतारः। ब्रह्मणस्तु तदानीं तन्नाभिकमलशायित्वम्। भोगिशय्यागत- वचनं तु "भगवन्नाभिसरोरुहव्यवधानसहम्" (१।३।२४) इति विष्णुचित्तीये प्रति- पादितम्॥ ६५-६८॥ अब एकार्णवशायी का ध्यान कहते हैं—विकार रूप वसुधाधार में तथा गुणसमुद्र में, मन, बुद्धि, अहङ्कार, प्रकृति, को जो सर्वज्ञ अपने पुरुषार्थ से प्रभावित कर सर्पशय्या पर स्थित हैं, जो मूर्त्तिधारी चक्रादि आयुधों से घिरे हुए हैं, लक्ष्मी जिनकी सेवा कर रही हैं, जो स्वयं निद्रा से समाक्रान्त हैं, प्रीति जिन्हें पङ्खा कर रही हैं और विद्या गीत गा रही हैं, ऐसे सुवर्ण विग्रह वाले एकार्णवशायी भगवान् का ध्यान करे॥ ६५-६८॥ १२. कूर्मध्यानकथनम् कूर्मात्मा कूर्मवद् बुद्ध्या ध्यातव्यस्त्वथ लाङ्गलिन्॥ ६८॥ द्रुत्कनकवर्णाभः स्वसामर्थ्याज्जलाश्रयः। शक्त्यादिककलाद्वन्द्वद्वितयाङ्घ्रिः सनातनः॥ ६९॥ शक्त्यादिककलाढ्यश्च प्रोद्गिरंस्तु श्रुतित्रयम्। अथ कूर्मध्यानमाह—कूर्मात्मेति द्वाभ्याम्। अस्य स्थानं तु—"रसातले तु कूर्मात्मा" (३६।३१८) इति पौष्करे दर्शितम्। अयं तु निखिलजगदाधारभूतकूर्मा- वतारः, "भवनधृते" (२३।६४) इति मन्त्रवर्णात्, "द्वन्द्वद्वितयाङ्घ्रिः" (१२।६९) इति ध्यानाच्च। केवलकूर्मवक्त्रावतारश्च विद्यते। तथा च पौष्करे— लवणोदधिपर्यन्ते भूभागे सिद्धसेविते। कूर्मवक्त्रश्च भगवान् संस्थितः शङ्खचक्रधृक्॥—(३६।३२२) इति॥ ६८-७०॥ अब कूर्म का ध्यान कहते हैं—हे लाङ्गलिन्! अब इसके बाद अपनी बुद्धि से कूर्मात्मा का कूर्मवद् ध्यान करे। जिनकी शरीर की आत्मा द्रवीभूत सुवर्ण कान्ति के समान है, अपनी सामर्थ्य से जो जल का आश्रय लिये हुए हैं, शक्त्यादि तथा कलादिक जिनके दो चरण हैं, जो अपने मुख से तीनों श्रुतियों का उद्‌गिररण करते रहते हैं, ऐसे कूर्म भगवान् का ध्यान करना चाहिये॥ ६८-७०॥ १३. वराहध्यानकथनम् अतसीपुष्पसंकाशः शङ्खचक्रगदाधरः॥ ७०॥ मखोपकरणाङ्गश्च निमग्नोद्धरणक्षमः।