भारतकोश
सात्वत संहिता (पाञ्चरात्र आगम - भगवान् सङ्कर्षण-नारद संवाद सान्वय सटीक)

सात्वत संहिता (पाञ्चरात्र आगम - भगवान् सङ्कर्षण-नारद संवाद सान्वय सटीक)

Satvata Samhita of Pancharatra Agama with Commentary

भगवान् सङ्कर्षण / महर्षि नारद द्वारा

DevanagariHindipublished837 पृष्ठ

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पृष्ठ 35

३२ सात्त्वतसंहिता प्रद्युम्न—जब वे ही विष्णु 'वीर्य' और 'ऐश्वर्य' का प्रकाशन करते हैं तब उनका नाम 'प्रद्युम्न' होता है। इनमें ज्ञान, बल, शक्ति और तेज का निगूहन होता है, अभाव नहीं। प्रद्युम्न का वर्ण रवि किरण के समान है। ये रक्ताम्बरधारी हैं। इनके चार हाथ में धनुष, बाण, शङ्ख और अभयमुद्रा विद्यमान है। इनकी ध्वजा का चिह्न 'मकर' है। ये मनस्तत्त्व के अधिष्ठाता होते हुए भी 'वीर्य' नामक गुण से धर्म का प्रवर्तन करते हैं और 'ऐश्वर्य' नामक गुण से जगत् की सृष्टि भी करते हैं। अनिरुद्ध—जब परब्रह्म परमात्मा 'शक्ति' और 'तेज' का प्रकाशन करते है तब उनका नाम अनिरुद्ध होता है। इनमें ज्ञान, बल, वीर्य, और ऐश्वर्य का निगूहन होता है, अभाव नहीं। अनिरुद्ध का वर्ण नील है। ये शुक्लाम्बरधारी हैं। इनके चार कर कमलों में खड्ग, खेट, शङ्ख और अभयमुद्रा रहती है। इनकी ध्वजा का चिह्न मृग है। अहंकार के अधिष्ठाता होते हुए भी ये 'तेज' नामक गुण से आत्मतत्त्व का प्रवर्तन करते हैं और शक्ति नामक गुण से जगत् का भरण-पोषण भी करते हैं। परब्रह्म के व्यूहान्तर इस प्रकार त्रिव्यूह का प्रतिपादन हुआ। कभी-कभी षाड्गुण्य मूर्ति परतत्त्व श्रीभगवान् विष्णु भी व्यूहों में सम्मिलित होते हैं। उस समय वे 'व्यूह-वासुदेव' के नाम से अभिहित होते हैं। ये शशिगौर और पीताम्बरधारी हैं। ये चार कर कमलों में शङ्ख, चक्र, गदा और अभयमुद्रा धारण करते हैं। इनकी ध्वजा का चिह्न 'गरुड' है। इस प्रकार भगवान् के चार व्यूह होते हैं। उपरोक्त व्यूहों के अतिरिक्त अन्य भी व्यूहान्तर हैं। (१) केशव, नारायण और माधव—ये तीन वासुदेव के विलास हैं। इनमें केशव स्वर्णाभ हैं और चार चक्र धारण करते हैं। नारायण श्याम वर्ण हैं और चार शङ्ख धारण करते हैं। माधव इन्द्रनील के समान वर्ण वाले हैं और चार गदाएँ धारण करते हैं। (२) गोविन्द, विष्णु और मधुसूदन—ये तीन सङ्कर्षण के विलास हैं। गोविन्द चन्द्र गौर हैं और चार शार्ङ्ग धनुष धारण करते हैं। विष्णु पद्म किञ्जल्क वर्ण हैं और चार हल धारण करते हैं। मधुसूदन अब्ज वर्ण हैं और चार मूसल धारण करते हैं। (३) त्रिविक्रम, वामन और श्रीधर—ये तीन प्रद्युम्न के विलास हैं। त्रिविक्रम अग्निवर्ण हैं और चार शङ्ख धारण करते हैं। वामन बालसूर्याभ हैं और चार वज्र धारण करते हैं। श्रीधर पुण्डरीक वर्ण हैं और चार पट्टिश धारण करते हैं। (४) हृषीकेश, पद्मनाभ और दामोदर—ये तीन अनिरुद्ध के विलास हैं। हृषीकेश तडिदाभ हैं और चार मुद्गर धारण करते हैं। पद्मनाभ सूर्याभ हैं और शङ्ख, चक्र, गदा, धनुष तथा खड्ग धारण करते हैं। दामोदर इन्द्रगोप वर्षा हैं और चार पाश धारण करते हैं।