सत्यार्थ प्रकाश (महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती विरचित)

सत्यार्थ प्रकाश (महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती विरचित)
Satyarth Prakash - Swami Dayananda Saraswati
महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा
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सत्यार्थप्रकाशसूचीपत्रम् ९
सत्यार्थप्रकाशसूचीपत्रम्
| निवेदनम् | ११ | पञ्चमसमुल्लासः | १०५-११५ |
| भूमिका | १२ | वानप्रस्थाश्रमविधिः | १०५ |
| प्रथमसमुल्लासः | १७-३२ | संन्यासाश्रमविधिः | १०६ |
| ईश्वरनामव्याख्या | १७ | षष्ठसमुल्लासः | ११६-१४५ |
| मङ्गलाचरणसमीक्षा | ३१ | राजधर्मविषयः | ११६ |
| द्वितीयसमुल्लासः | ३३-३९ | सभात्रयकथनम् | ११६ |
| बालशिक्षाविषयः | ३३ | राजलक्षणानि | ११७ |
| भूतप्रेतादिनिषेधः | ३५ | दण्डव्याख्या | ११९ |
| जन्मपत्रसूर्यादिग्रहसमीक्षा | ३६ | राजकर्त्तव्यम् | १२० |
| तृतीयसमुल्लासः | ४०-६९ | अष्टादशव्यसननिषेधः | १२१ |
| अध्ययनाध्यापनविषयः | ४० | मन्त्रिदूतादिराजपुरुषलक्षणानि | १२२ |
| गुरुमन्त्रव्याख्या | ४१ | मन्त्र्यादिषु कार्यनियोगः दुर्गनिर्माणव्याख्या | १२४ |
| प्राणायामशिक्षा | ४२ | युद्धकरणप्रकारः | १२५ |
| सन्ध्याग्निहोत्रोपदेशः | ४३ | राज्यरक्षणादिविधिः | १२६ |
| यज्ञपात्राकृतयः | ४३ | ग्रामाधिपत्यादिवर्णनम् | १२८ |
| उपनयनसमीक्षा | ४५ | करग्रहणप्रकारः | १३० |
| ब्रह्मचर्योपदेशः | ४५ | मन्त्रकरणप्रकारः | १३१ |
| ब्रह्मचर्य्यकृत्यवर्णनम् | ४७ | आसनादिषाड्गुण्यव्याख्या | १३२ |
| पञ्चधा परीक्ष्याध्ययनाध्यापने | ५२ | राज्ञो मित्रोदासीनशत्रुषु वर्त्तनम् | १३३ |
| पठनपाठनविशेषविधिः | ६१ | शत्रुभिर्युद्धकरणप्रकारश्च | १३४ |
| ग्रन्थप्रामाण्याप्रामाण्यविषयः | ६४ | व्यापारादिषु राजभागकथनम् | १३६ |
| स्त्रीशूद्राध्ययनविधिः | ६७ | अष्टादशविवादमार्गेषु धर्मेण न्यायकरणम् | १३७ |
| चतुर्थसमुल्लासः | ७०-१०४ | साक्षिकर्त्तव्योपदेशः | १३९ |
| समावर्त्तनविषयः | ७० | साक्ष्यानृते दण्डविधिः | १४१ |
| दूरदेशे विवाहकरणम् | ७१ | चौर्यादिषु दण्डादिव्याख्या | १४२ |
| विवाहे स्त्रीपुरुषपरीक्षा | ७१ | सप्तमसमुल्लासः | १४६-१७० |
| अल्पवयसि विवाहनिषेधः | ७२ | ईश्वरविषयः | १४६ |
| गुणकर्मानुसारेण वर्णव्यवस्था | ७५ | ईश्वरस्तुतिप्रार्थनोपासनाः | १५० |
| विवाहलक्षणानि | ८० | ईश्वरज्ञानप्रकारः | १५५ |
| स्त्रीपुरुषव्यवहारः | ८१ | ईश्वरस्यास्तित्वम् | १५६ |
| पञ्चमहायज्ञाः | ८५ | ईश्वरावतारनिषेधः | १५७ |
| पाखण्डितिरस्कारः | ८८ | जीवस्य स्वातन्त्र्यम् | १५८ |
| प्रातरुत्थानम् | ८९ | जीवेश्वरयोर्भिन्नत्ववर्णनम् | १५९ |
| पाखण्डिलक्षणानि | ९० | ईश्वरस्य सगुणनिर्गुणकथनम् | १६५ |
| गृहस्थधर्माः | ९१ | वेदविषयविचारः | १६६ |
| पण्डितलक्षणानि | ९३ | अष्टमसमुल्लासः | १७१-१९१ |
| मूर्खलक्षणानि | ९४ | सृष्ट्युत्पत्त्यादिविषयः | १७१ |
| पुनर्विवाहविचारः | ९५ | ईश्वरभिन्नाया प्रकृतेरुपादानकारणत्वम् | १७४ |
| नियोगविषयः | ९६ | सृष्टौ नास्तिकमतनिराकरणम् | १७५ |
| गृहाश्रमश्रैष्ठ्यम् | १०३ | मनुष्याणामादिसृष्टेः स्थानादिनिर्णयः | १८५ |