सेहत संजीवनी
Sehat Sanjivani
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: June 2009 First Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Post-Raya, Distt.-Samba (J & K) · 2009 (उद्गम)
26
साहिब बन्दगी
काढ़ा बना लें। आधा पानी रह जाए तो उतारकर छान लें। फिर 3 पाव मिश्री मिलाकर आँच दें। चासनी होने पर उतार दें। पिप्पली का चूर्ण मिलाकर यह शरबत सेवन करें।
- □ भूख को खोलता है।
- □ सर्व ज्वर का नाश करता है।
- □ गुरुची, छोटी इलायची, पिप्पली, बड़ी इलायची, चन्दन, उसबा, मुलहठी, धनियाँ—सब 100-100 ग्राम लेकर 10 किलो पानी में डालकर काढ़ा बना लें। जब तीन किलो पानी रह जाए तो डेढ़ किलो मिश्री मिलाकर धीमी-2 आँच पर रखें। चासनी हो जाए तो उतार लें। पिप्पली के चूर्ण के साथ यह शरबत लें।
- □ कफ, पित्त और वात-त्रिदोष का नाश करता है।
- □ गिलोय, पिप्पली, अदरक, दोनों चन्दन, मिर्च, पीपरामूल, अतीस—सब 30-30 ग्राम, 250 ग्राम चिरायता ले कूटपीसकर छान लें।
- □ सर्व ज्वर का नाश करता है।
प्रमेह की दवा
- □ पीपर, कटहल, बबूल और महुआ की छाल, चन्दन, गुरुची—सब 120-120 ग्राम लेकर कूटपीसकर 8 किलो पानी में भिगो दें। सुबह काढ़ा बनाएँ। 3 किलो रह जाए तो सवा किलो मिश्री मिलाकर शरबत तैयार कर लें।
- □ प्रमेह रोग का नाश करता है।
- □ पित्त को खत्म करता है।
सारे शरीर के दर्द की दवा
- □ 12 ग्राम काली मिर्च, 12-12 ग्राम दोनों हड़का-बकल, 12 ग्राम
सेहत संजीवनी
27
काला जीरा, 60 ग्राम मुनक्का, 12 ग्राम अदरक, 12 ग्राम करंजवा की गिरी-सबको कूटपीसकर छान लें। छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। 35 ग्राम यह दवा रोज लें।
प्रदर की दवा
- □ 8 ग्राम चौराई की जड़ का रस, 12 ग्राम मुलहठी-दोनों शहद में मिलाकर पीएँ।
- □ सर्व प्रकार का प्रदर रोग दूर होता है।
- □ सफेद जीरा, कमलगट्टा, सेंधा नमक, जेठीमधु-सबका चूर्ण कर शहद के साथ खाएँ।
- □ प्रदर रोग को लाभ करता है।
पागल कुत्ते के काटे की दवा
- □ 1 ग्राम मिर्च, 1 ग्राम जीरा कूटपीसकर आधा पाव पानी में मिलाकर 9-10 दिन तक सेवन करें।
- □ प्याज का रस शहद में मिलाकर काटे वाले स्थान पर लेप करें।
- □ यह लेप घाव को भरता है।
- □ शुद्ध चौकिया सोहागा, शुद्ध कुचला, शुद्ध तेलिया-तीनों बराबर मात्रा में लेकर कूटपीस लें। 125 मिली ग्राम यह दवा खाएँ। 20 दिन तक यह दवा लें।
- □ प्याज कूटकर शहद के साथ मिलाकर लेप करें।
- □ काली मिर्च, सफेद जीरा, काला जीरा सबको पीसकर पीएँ। 27 दिन तक यह दवा लें।
28
साहिब बन्दगी
बिच्छू के काटे की दवा
- ❑ नौसादर, सोहागा, कलीका चूना सबको कूटपीसकर सूँघें।
- ❑ जायफल, इन्द्रायन की जड़, हरताल सबको घिसकर लगाएँ।
- ❑ अथझड़ा का रस घिसकर लगाएँ।
- ❑ हींग और हरताल को तरंज के रस में पीसकर गोलियाँ बना लें और बिच्छू काटे की जगह पर लेप करें।
- ❑ मोम जलाएँ और जख्म वाली जगह धूनी दें।
साँप के काटे की दवा
- ❑ सफेद मंदार की भस्म, सफेद मिर्च, नीलाथोथा-तीनों बराबर मात्रा में लेकर कूटपीस लें। फिर 1-1 ग्राम की गोली बना लें। यह गोली पानी के साथ दें।
- ❑ आक की जड़ और कच्चा नीलाथोथा-दोनों समान मात्रा में लेकर कूटपीसकर चूर्ण कर लें। 5-5 ग्राम यह चूर्ण नाक में भरेँ और किसी फूँकनी से फूँकें।
- ❑ 35 ग्राम गाय के घी में 3 ग्राम लाहौरी नमक मिलाकर पिलाएँ।
- ❑ काली मिर्च और कुचला पीसकर पिलाएँ।
- ❑ 250 मिली ग्राम तूतिया, 1 ग्राम कमलगट्टा, गर्म पानी में पीसकर पिलाएँ।
- ❑ 2 ग्राम हीराहींग 2-3 बार पिलाएँ।
- ❑ 6 ग्राम फिटकरी पीसकर पिलाएँ।
- ❑ चूहे की मेंगनों का लेप करें।
- ❑ मूली में नमक मिलाकर लगाएँ।
सेहत संजीवनी
29
जहर खा लेने की दवा
- ❑ दही के साथ सनाय खिलाएँ।
अजीर्ण की दवा
- ❑ 20 ग्राम जीरा, 20 ग्राम हरड, 15 ग्राम अदरक, 25 ग्राम पोहकर मूल, 30 ग्राम कूट, 8 ग्राम बच, 12 ग्राम बिड़ नमक, 4 ग्राम हींग-सबको कूटपीसकर किसी साफ कपड़े से छान लें। 6 ग्राम यह दवा गर्म पानी के साथ रोगी को दें।
- ❑ बच, पीपर, हींग, सोंचरनमक, हरड सब बराबर मात्रा में लेकर कूटपीस लें। फिर किसी साफ कपड़े से छान लें। 8 ग्राम यह दवा पानी के साथ रोगी को दें।
- ❑ चित्रक, बच, अदरक, हींग, कूट, अजवाइन-सब दवा बराबर मात्रा में ले कूटपीसकर छान लें। 5 ग्राम यह दवा गर्म पानी के साथ रोगी को दें।
- ❑ यह दवा खाँसी का नाश करती है।
- ❑ वायुगोला को भी दूर करती है।
मुँह में दुर्गंध की दवा
- ❑ छुहारे के साथ सनाय खाएँ।
वातरोग की दवा
- ❑ 5 ग्राम तुलसी के पत्ते, 5 ग्राम घी, 5 ग्राम मिर्च-सबको एक साथ कूटपीसकर मिला लें।
- ❑ वातरोग का नाश करता है।
30
साहिब बन्दगी
आमवात की दवा
- □ अदरक, पीपल, देवदारु, अरंड की जड़, गिलोय, मिर्च, सांठी, अमलतास, राक्षा-सबको पानी में डालकर आग पर रखें और काढ़ा तैयार कर लें। फिर अदरक का कल्क मिलाकर पीएँ।
- □ अरंड की जड़, राक्षा, अदरक, गिलोय, दारुहल्दी-सबका काढ़ा तैयार कर उसमें एरंड का तेल मिलाकर पीएँ।
पेट के कीड़ों की दवा
- □ 25 ग्राम दोनों हड़का-बकल, 60 ग्राम सोनामकखी, 12 ग्राम अदरक, 60 ग्राम गुलकंद, 12 ग्राम मुनक्का-सबको कूटपीसकर शहद में मिलाकर छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। 12 ग्राम यह दवा रोज खाएँ।
- □ जवाखार, पीपल, बिरंग, लाहौरी नमक, अजमोद, अदरक, काबुली, हड़का-बकल-सब 25-25 ग्राम, हींग 12 ग्राम ले कूटपीसकर छान लें। 6 ग्राम यह दवा सुबह खालीपेट सेवन करें।
- □ पेट के कीड़े मरते हैं।
प्लीहा रोग की दवा
- □ शुद्ध सोहागा, शुद्ध सिंगिया-दोनों बराबर मात्रा में लेकर अदरक के रस में पीसकर छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें।
- □ वायुगोला, प्लीहा नष्ट होते हैं।
सिर की जूँ की दवा
- □ मूली के पत्तों के रस में पारा मिलाकर बालों में लगाएँ।
सेहत संजीवनी
31
भगन्दर रोग की दवा
- □ पीपल, बहेड़ा, आँवला, गूगुल, हर्र-सबको कूटपीसकर छान लें। 8 ग्राम इस दवा का सेवन करें।
बीस परमा की दवा
- □ दूध में मिश्री और शिलाजीत मिलाकर 20 दिन सेवन करें।
- □ गोखरू, अकरकरा, लोहासार, छोटी इलायची, त्रिकूट, जाविव्री, सतावरि, असगंध, दालचीनी, लौंग, जायफल, केसर, चीता, नागौरी-सब दवाएँ 25-25 ग्राम लेकर अच्छी तरह से कूटपीस लें। अब 650 ग्राम मिश्री लेकर कूटपीसकर इस दवा में अच्छी तरह से मिला लें। अब इसकी 8-8 ग्राम की गोलियाँ बना लें। सुबह-शाम 1-1 गोली रोगी को खिलाएँ तो लाभकारी सिद्ध हो।
- □ हल्दी, अदरक रस और त्रिफला-सबको कूटपीसकर शहद के साथ दो हफ्ते रोगी को खिलाएँ।
- □ अगर काला, नागरमोथा, लौंग, छोटी इलायची, गोखरू, गिलोय, सतावरी, सफेद चंदन, चित्रक, कूट, वंशलोचन, असगंध, जायफल, निसोथ, कमलगढ़ा, नागकेसर, खस, तगर-सब दवा बराबर लेकर कूटपीसकर छान लें। अब इतनी ही मिश्री मिलाकर रख लें। 12 ग्राम यह दवा सुबह-सुबह खाएँ। बहुत लाभकारी सिद्ध होगी।
- □ 12 ग्राम गुड़ के साथ गंधक रोगी को खिलाएँ। फिर ऊपर से दूध पिलाएँ। यह दवा तीन हफ्ते करें।
- □ इलायची, शिलाजीत, शंखाहोली-सबको कूटपीसकर छान लें। यह दवा सुबह के समय पानी के साथ लें।
32
साहिब बन्दगी
- □ सभी प्रकार के परमों की दवा है।
- □ गिलोय के रस में शहद मिलाकर पीना बड़ा हितकर रहता है।
- □ ग्वार को पीसकर छान लें। अब 6-7 छींटे गोभी के रस के देकर इसका चूर्ण कर लें। फिर दवा के बराबर की मिश्री मिलाकर रख लें। यह दवा 20 ग्राम पानी के साथ हररोज खाएँ।
- □ घृत परमा दूर होता है।
- □ लहसुन, जायफल, अदरक, मिर्च-सबको पानी में डाल काढ़ा तैयार कर लें।
- □ परमा रोग की बढ़िया दवा है।
- □ 5 ग्राम फिटकरी का रस पके हुए केले में डालकर खाएँ।
- □ सफेद परमा की बढ़िया दवा है।
- □ 60 ग्राम आँवले, 60 ग्राम आंबा हल्दी, 60 ग्राम मिश्री मिलाकर कूटपीसकर छान लें। 5-6 महीने खाएँ।
- □ शिलाजीत, शंखाहुली, इलायची-सबको पीसकर चूर्ण करके चीनी के साथ सेवन करें।
- □ ककही और जसवंती की पत्तियाँ बराबर मात्रा में लेकर आधा किलो पानी में डालकर अच्छी तरह से मलें। फिर इसमें तीन तोले मिश्री मिलाकर पीएँ।
- □ लाल परमा दूर होता है।
- □ एक पाव ईसबगोल शाम के समय भिगो दें। सुबह 1 नीबू निचौड़ें और 5 ग्राम मिश्री मिला लें। यह दवा 10-12 दिन तक करें।
- □ पीला परमा नष्ट होता है।
सेहत संजीवनी
33
आँखों की लाली की दवा
- □ हर, बहेड़ा और आँवला-तीनों को मिलाकर पानी में भिगो दें। लगभग डेढ़ घंटे के बाद पानी से निकालकर यह दवा आँखों में डालें।
आँखों की रोशनी की दवा
- □ आँवला, दालचीनी, संधानमक, बहेड़ा, छोटी हर, मिर्ची, पीपर-सब एक-एक ग्राम लेकर पीस लें। फिर किसी साफ कपड़े से छानकर नींबू के पतों के रस में पीसें। इसी दवा को एक दिन काली मकोय के रस में पीसें। अब इस दवा की छोटी-छोटी गोली बनाकर सुरखा दें।
- □ इस दवा को बासे पानी में घिसकर तीन हफ्ते तक आँजने से आँखों की रोशनी बढ़ती है।
दाद की दवा
- □ खुरासानी, सुहागा, अजवाइन, राल, गंधक-सबको पीसकर पानी की सहायता से छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। फिर दाद को खुजाकर उस पर लगाएँ।
- □ पवांड के बीज और मदार के फूलों को पीसकर खट्टे दही में मिलाएँ और मालिश करें।
- □ कुचले को सिरके में पीसकर लगाएँ।
- □ मूली के बीज शराफ के पतों के रस में पीसकर लगाएँ।
- □ इमली के बीज सिरके में पीसकर लगाएँ।
34
साहिब बन्दगी
नाक की बीमारी की दवा
- □ ईसबगोल को सिरके में भिगोकर माथे पर लेप करें।
- □ गाय का गोबर जलाकर नाक में फूँकें।
- □ बेरी के पत्ते पीसकर माथे पर लेप करें।
पेशाब बार-बार आने की दवा
- □ सूखे हुए सिंघाड़े कूटपीसकर छान लें। फिर इसमें शक्कर मिलाकर खाएँ। 12 ग्राम यह दवा लें।
- □ काले तिल में शक्कर मिलाकर सेवन करें।
- □ बबूल की सूखी फली कूटपीसकर छान लें। फिर इसे घी में भूनकर शक्कर मिलाकर सेवन करें। दवा 5-6 ग्राम ही लें।
आग से जल जाने की दवा
- □ इमली की छाल पीसकर घी में मिलाकर लगाएँ।
पेशाब बंद हो जाने की दवा
- □ चूहे की मँगनें पीसकर नाभि के नीचे लगाएँ।
- □ 1 ग्राम कलमी शोरा, 1 ग्राम राई और इसके बराबर शक्कर मिलाकर सेवन करें।
आँखों की फूली की दवा
- □ ऊपर आँखों की रोशनी वाली दवा को शहद में घिस कर अंजन की तरह लगाएँ।
- □ हफ्ते तक आँजने से आँखों की फूली ठीक होती है।
सेहत संजीवनी
35
पाण्डु रोग की दवा
- □ सोनामाखी, बेर की गुठली, त्रिकुट, तज, मिर्च-सब बराबर मात्रा में लेकर कूटपीस लें। अब किसी साफ कपड़े से छान लें। अब इस चूर्ण की शहद के साथ छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें।
- □ सुबह 1 गोली छाछ के साथ खाने से पाण्डुरोग दूर होता है।
खाँसी की दवा
- □ काकड़ासिंगी कूटपीसकर छान लें। फिर छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। सोते समय लें।
- □ बलगमी खाँसी को दूर करती है।
- □ 3 ग्राम सफेद सज्जी, 12 ग्राम हल्दी पानी में पीसकर छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। सोते समय लें।
- □ नौसादर लेकर आधा भून लें। फिर उतनी ही काली मिर्च मिलाकर घीकुंआर के रस में पीसकर छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। माँ के दूध में यह गोली पीसकर पिलाएँ।
- □ लौंग, नमक और काली मिर्च-सबको तवे पर रखकर जला लें और सोते समय लें।
शीतपित्त की दवा
- □ गुड़ में अजवाइन मिलाकर रोगी को ढाई से तीन हफ्ते तक खिलाएँ।
आँखों की पीड़ा
- □ हींग, गुड़, केसर, मिर्च, सेंधा नमक-सबको पानी में पीसकर सूँघें।
36
साहिब बन्दगी
- □ सिर और आँखों की पीड़ा दूर होती है।
- □ हीराकशीश, रसौत, घी, शहद-सब बराबर मात्रा में लेकर पीस लें। फिर स्त्री के दूध में मिलाकर आँखों में अंजन की तरह लगाएँ।
- □ आँखों की पीड़ा दूर होती है।
उपदेश की दवा
- □ 50 ग्राम आँवला, 12 ग्राम जमालगोटा-दोनों को कूटपीसकर साफ कपड़े से छान लें। फिर नींबू के रस के साथ पीसकर छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। यह गोली ठंडे जल से सुबह के समय दो हफ्ते सेवन करें।
- □ 10 ग्राम गुलारमनी मिट्टी में इतना ही कलमीशोरा-दोनों को पीसकर 3 किलो पानी में मिलाएँ। यह पानी रोगी के लिए अत्यंत लाभकारी है। इससे पेशाब खुलकर होगा।
- □ 25 ग्राम मिर्च, 70 ग्राम भुंगराज-दोनों को पूरा दिन कूटपीसकर अच्छी तरह से मिला लें। फिर बेर के बराबर की गोलियाँ बना लें। सुबह-शाम एक-एक गोली खाएँ।
- □ सफेद खैर, सफेद सुपारी, शुद्ध शंखिया, भुंगराज, अकरकरा-सब 5-5 ग्राम लेकर कूटपीस लें। फिर किसी साफ कपड़े से छान पानी में घोंटकर छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। सुबह-शाम 1-1 गोली पानी के साथ लें। हफ्ते-भर में यह गोली लाजवाब असर दिखायेगी।
- □ 12 ग्राम आक की जड़, 35 ग्राम मिर्च लेकर अच्छी तरह से कूटपीस लें। फिर इसमें गुड़ मिलाकर छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। सुबह-शाम 1-1 गोली खाएँ। बड़ी हितकारी है।
सेहत संजीवनी
37
क्षयरोग की दवा
- □ चन्दन, कपूर, लौंग, जटामांसी, इलायची, कमलगढ़ा, अगर, जीरा, उशीर, नागकेसर, कंकोल, वंसलोचन, तज, नागरमोथा, पीपल, अरूवारी, जायफल, तगर—सब 25-25 ग्राम लेकर कूटपीस लें। फिर दवा से आधी मात्रा मिश्री की लेकर इसमें मिला लें। दवा तैयार है।
- □ क्षयरोग दूर होता है।
- □ गले के रोग भी दूर होते हैं।
- □ अतिसार की बढ़िया दवा है।
- □ संग्रहणी रोग की भी अच्छी दवा है।
श्वास की दवा
- □ 1 किलो बड़ी हरड, 1 किलो भारंगी, 1 किलो दशमूल, 10 किलो पानी में डालकर आग पर रखें। जब तीसरे हिस्से से कम रह जाए तो किसी साफ कपड़े से छान लें। फिर उसमें डेढ़ किलो गुड़ मिलाएँ और दुबारा आग पर रखें। जब चटनी हो जाए तो उतार लें। फिर उसमें 350 ग्राम शहद, 60 ग्राम मिर्ची, 60 ग्राम अदरक, 60 ग्राम पीपल, 60 ग्राम तमालपत्र, 35 ग्राम यवाखार, 60 ग्राम दालचीनी, 60 ग्राम इलायची—ये सब दवाएँ डालें। इन सबका चूर्ण करके ही डालें और अच्छी तरह से मिला लें। यह भारंगी गुड़ तैयार हो गया।
- □ यह कई प्रकार के श्वास की बेहतरीन दवा है।
- □ खाँसी की भी यह बढ़िया दवा है।
- □ 85 ग्राम वंसलोचन, 85 ग्राम पीपर, 25 ग्राम इलायची, 12 ग्राम दालचीनी, 150 ग्राम मिश्री लेकर सबका चूर्ण कर लें। इस चूर्ण
38
साहिब बन्दगी
को घी और शहद मिलाकर खाएँ।
- □ दालचीनी, पीपल, अदरक, भीमसेनी कपूर, कचूर, गिलोय, नागरमोथा, कमलकंद, पुष्करमूल, भूमि आँवला, तुलसी, काला अगर, इलायची-सब समान मात्रा में लेकर कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को दो गुणा चीनी में मिलाकर रोगी को खाना चाहिए।
- □ 5 ग्राम गन्धक, 5 ग्राम मैनशिल, 5 ग्राम पारा, 5 ग्राम पीपल, 5 ग्राम मिर्च-सबको कूटपीसकर किसी साफ कपड़े से छान लें। अब पानी की सहायता से इसकी गोलियाँ बनाएँ।
- □ यह गोली श्वास और खाँसी के लिए बहुत लाभकारी है।
अतिसार की दवा
- □ शिलाजीत, बेलगिरी, पीपलामूल, अदरक, चित्रक, राल, गजपीपर, पीपर-सब बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह से कूटपीस लें। अब किसी साफ कपड़े से छानकर रख लें। 8 ग्राम यह दवा बड़ी लाभकारी सिद्ध होगी।
- □ अजमोद, मोचरस, अदरक-सबको कूटपीसकर चूर्ण कर लें। यह चूर्ण छाछ के साथ सेवन करें।
- □ बेल का गूदा, इन्द्रयव, लोध, मोचरस-सबको पीसकर गुड़ के साथ मिलाकर गोलियाँ बना लें।
- □ अतिसार में लाभकारी है।
कफातीसार की दवा
- □ हींग, बच, कालानोन, अतीस, संधानोन-सब बराबर मात्रा में ले अच्छी तरह से कूटपीसकर छान लें। 8 ग्राम यह दवा गर्म
सेहत संजीवनी
39
पानी के साथ लेना बड़ा हितकर है।
पित्तातीसार की दवा
- □ अतीस, इन्द्रियव, धौ के फूल, अदरक, मुलहठी, बेलगिरी, रसौत-सबको कूटपीसकर छान लें। 3-4 ग्राम यह चूर्ण सांठी के चावल के साथ सेवन करें।
- □ पित्तातीसार को ठीक करता है।
- □ अन्य पेट के रोगों को दूर करने में भी यह बड़ा ही लाभदायक है।
वातातीसार की दवा
- □ कौरैया की छाल, नागरमोथा, संधानमक, त्रिफल, अतीस, हींग-सब दवा बराबर मात्रा में ले अच्छी तरह से कूटपीसकर छान लें। 5 ग्राम यह दवा गर्म पानी के साथ रोगी को दें।
दांतों में दर्द की दवा
- □ 25 ग्राम पीली हरड की छिलका, 12 ग्राम काली मिर्च, 9 ग्राम अनार का चूर्ण, 25 ग्राम जलाया हुआ माजूफल, 6 ग्राम तेजपात-सबको कूटपीसकर छान लें और फिर इसका मंजन की तरह इस्तेमाल करें।
- □ दांतों के लिए बड़ा हितकारी है।
- □ खट्टे अनार का छिलका, फिटकरी, सेंधा नमक, हर-सबको मिलाकर पीस लें। अब किसी कपड़े से छानकर रख लें।
- □ इस चूर्ण का मंजन दांतों के लिए बड़ा लाभकारी है।
- □ 1 ग्राम तूतिया की भस्म, 5 ग्राम अकरकरा, 5 ग्राम सेंधा नमक,
40
साहिब बन्दगी
1 ग्राम बालछड़, 5 ग्राम जलाई हुई सुपारी, 1 ग्राम नारगमोथा, 12 ग्राम जलाया हुआ बादाम, 12 ग्राम तुलसी की पत्तियाँ, 12 ग्राम रूमीमस्तंगी, 5 ग्राम काली मिर्च, 1 ग्राम कस्तूरी-सबको कूटपीसकर छान लें।
□ इस चूर्ण का मंजन दाँतों को लाभ करता है।
दाँत हिलने की दवा
□ ऊपर दाँतों के दर्द की दवा वाला मंजन ही करें। बड़ा हितकारी है।
□ 25 ग्राम फिटकरी, 6 ग्राम गुलाब के फूल, 6 ग्राम अकरकरा, 35 ग्राम खट्टे अनार के छिलके, 6 ग्राम माजूफल-सबको कूटपीसकर किसी साफ कपड़े से छान लें।
□ इस दवा के मंजन से दाँतों का हिलना दूर होता है।
□ दाँतों में लगे कीड़े भी नष्ट होते हैं।
मूगी की दवा
□ खुरशानी, बच-दोनों को बराबर मात्रा में लेकर कूटपीस लें। यह चूर्ण शहद के साथ 8 ग्राम की मात्रा में सेवन करें।
□ मूगी की बद्धिया दवा है।
□ शंखाहोली, बच, ब्रह्मणी, कुट-सबको कूटपीसकर छान लें। यह चूर्ण गाय के घी के साथ सेवन करने से बड़ा लाभ होता है।
□ मूगी का नाश करता है।
मूत्रकृच्छ्र की दवा
□ कुड़ा की छाल को गाय के दूध में अच्छी तरह से पीस लें। यह
सेहत संजीवनी
41
दवा लाजवाब है।
- □ दूध में गुड़ मिलाकर गर्म कर लें।
- □ यह दवा मूत्रकृच्छ्र के लिए बड़ी हितकारी है।
- □ मुलहठी, ककड़ी के बीज, दारुहल्दी-सबको कूटपीसकर चूर्ण कर लें। यह दवा चावल के धोवन के साथ रोगी को पिलाएँ।
- □ मूत्रकृच्छ्र को नष्ट करता है।
- □ सनाय की पत्ती और ककड़ी के बीज मिलाकर कूटपीस लें। यह दवा पानी के साथ लें।
- □ गोखरू का काढ़े में जवाखार मिलाकर पीना बड़ा लाभकारी है।
- □ यह पुराने मूत्रकृच्छ्र को भी नष्ट करता है।
- □ कुश, डाभ, कास, इष, शर-सबको पानी में डालकर काढ़ा बना लें।
बाँझपन की दवा
- □ केशरनाग, गोरोचन, असगंध-सबको कूटपीसकर ठंडे पानी के साथ पीएँ।
दाँतों में कीड़े की दवा
- □ 12 ग्राम पीली हरर की छाल, 12 ग्राम गुलाब के फूल, 3 ग्राम गुलनार, 12 ग्राम जलाई हुई सुपारी, 12 ग्राम इन्द्रायन के मग्ज-सबको कूटपीसकर किसी साफ कपड़े से छान लें।
- □ इस दवा का मंजन करना बड़ा हितकारी है। यह मंजन दाँतों की पीड़ा को भी दूर करता है।
42
साहिब बन्दगी
पेट की वायु की दवा
- □ बायबिडॉंग, समुद्रफेन, काली मिर्च, जवाखार, सेंधा नमक, सोंघर नमक, निसंग, अजमोद, शुंठी-सब 15-15 ग्राम लेकर कूटपीस लें। फिर 4 ग्राम भुनी हुई हींग इसमें मिला लें। इस चूर्ण को गर्म पानी के साथ रात को सोते समय लें।
- □ लहसुन की फॉर्कें छील लें। फिर मुत्रके के बीज निकाल लें। अब इन मुत्रकों में वो छीलें लपेट लें। यह छीलें भोजन के पश्चात चबाकर खाएँ।
- □ पेट में रुकी हुई हवा को निकालती है।
- □ कचूर, सेंधा नमक, सोंघर नमक, धनियाँ, जीरा, कूट, त्रिकुटा, पिपलामूल, हरड-सबको कूटपीसकर गर्म पानी के साथ सेवन करें। 5-6 ग्राम यह दवा लें।
- □ पेट की वायु से होने वाली पीड़ा का हरण करती है।
- □ 120 ग्राम दही के मट्टे में आधा ग्राम काला नमक और 2 ग्राम अजवाइन डालकर सेवन करें। यह दवा दिन के भोजन के बाद 8-10 दिन तक लें।
आँखों की दवा
- □ मेंहदी, त्रिफला, जस्ता-सब बराबर मात्रा में लेकर कूटपीस लें। फिर इस दवा को अंजन के रूप में इस्तेमाल करें।
अम्लपित्त की दवा
- □ कडूपरवर, गिलोय, नीम, चिरायता, त्रिफला, बाँसा, भाँगरा, पित्तापपड़ा-सबको मिलाकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े में शहद मिलाकर रोगी को दें।
सेहत संजीवनी
43
- □ नीम, गिलोय, चीता, कट्टुपरवर—सबको मिलाकर काढ़ा तैयार करें। इस काढ़े में शहद मिलाकर रोगी को दें।
मूत्ररोग की दवा
- □ गोखरू, खीरे के बीज, त्रिफला, संधा नमक—सबको कूटपीसकर गर्म पानी के साथ पीएँ।
- □ मूत्र रोग को दूर करता है।
वातज्वर की दवा
- □ गिलोय, चिरायता, अदरक और नागरमोथा—इन सबको पानी में डालकर आग पर रखें। जब काढ़ा तैयार हो जाए तो उतार लें। काढ़े के रूप में यह वातज्वर की बेहतरीन दवा तैयार हो गयी।
- □ पिपरामूल, अदरक, गिलोय, पिठवन, कूटकी, उशीर, नागरमोथा, सरबन, गोखरू, किरात, कास्मरी—सब 25-25 ग्राम ले कूटपीस लें। फिर एक किलो पानी में डालकर काढ़ा बना लें। 250 ग्राम रह जाए तो छानकर पी लें।
आमवात की दवा
- □ अदरक, बायबिडंग, हरड, देवदारू—सबको बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बना लें।
- □ यह काढ़ा आमवात का नाश करता है।
वातपित्त की दवा
- □ चिरायता, अदरक, गिलोय—सबको पानी में मिलाकर काढ़ा बनाकर पीएँ।
44
साहिब बन्दगी
- □ त्रिफला और अडूँसे के पत्ते लेकर उनका काढ़ा तैयार करें। सुबह इस काढ़े का सेवन करें।
- □ वात और पित्त की बढ़िया दवा है।
- □ आँवला, गुरच, मुनक्का, चिरायता, दाख-सबका काढ़ा बनाकर पीएँ।
- □ पित्त और वात का नाश करता है।
- □ सफेद जरी को धूनकर चूर्ण बना लें। फिर उसमें गुड़ मिलाकर भोजन करें।
- □ वात और पित्त का नाश करता है।
पित्तदाह की दवा
- □ इन्द्रयव, देवदारू, कुटकी, जायफल, नागरमोथा-सबको बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बना लें। आधा पाव यह काढ़ा पीएँ। 10 दिन यह दवा करें।
उलटी करने की दवा
- □ मनफल, फिटकरी और नीलाथोथा-तीनों को बराबर मात्रा में कूटपीसकर मिला लें। यह दवा गर्म पानी के साथ पीएँ।
- □ इससे उलटी होती है।
सन्निपात ज्वर की दवा
- □ त्रिफले का काढ़ा बनाकर 4 ग्राम गाय के घी के साथ मिलाकर सुबह के समय लें।
- □ मुनके का काढ़ा तैयार करें। फिर उसमें 2 ग्राम पीपर पीसकर मिलाएँ। यह दवा सुबह समय पीएँ।
सेहत संजीवनी
45
- □ चिरायता, नागरमोथा, अदरक-सबका चूर्ण बना लें। इसका सेवन शहद के साथ करें।
श्वस, दमा, खाँसी की दवा
- □ 5 किलो बबूल की छाल, 5 किलो भटकटैया, तीन किलो पोस्ता, धाव के फूल-सबको मिलाकर आठ किलो पानी डालें और काढ़ा बना लें। एक किलो पानी रह जाए तो कपड़े से छान लें। फिर इलाचयी, अदरक, लौंग, हर्ष, पीपल-सब 50-50 ग्राम ले कूटपीसकर किसी कपड़े से छान लें और ऊपर के काढ़े में डाल दें। तब इसकी छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। सुबह शाम एक-एक गोली खाएँ।
- □ खाँसी को दूर करता है।
- □ दमा और श्वस का नाश करता है।
ज्वर की दवा
- □ पित्तापपड़ा, गुरुची, पीपरी, चिरायता, अदरक-सब बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बना लें। सुबह के समय यह दवा रोगी को दें। 7-8 दिन तक इस दवा का सेवन करें।
पित्तज्वर की दवा
- □ मालकांगुणी, बांसा, चिरायता, पित्तापपड़ा, कटुकी, धमासा आदि को पानी में डालकर आग पर रखें। जब काढ़ा तैयार हो जाए तो उतार लें। इस काढ़े में मिश्री डालकर रोगी को पिलाएँ।
- □ प्रियंगु, चिरायता, कूट, पीपरी, मिश्री, जवांसा, बांसा-सब 30-30 ग्राम लेकर तीन पाव पानी में डालकर काढ़ा बना लें। जब