सेहत संजीवनी
Sehat Sanjivani
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: June 2009 First Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Post-Raya, Distt.-Samba (J & K) · 2009 (उद्गम)
पीड़ा देता है। फिर फूटने पर उसमें से लाल फेन बहता है, जिससे अनेक घाव हो जाते हैं। यही भगन्दर रोग को जन्म देता है।
शीतपित्त ( पित्ती उछलना ) के लक्षण
- ❑ शरीर में सूजन हो जाती है।
- ❑ लाल-लाल चकते (गोल दाग) निकल आते हैं।
- ❑ खुजली होती है।
अम्लपित्त के लक्षण
- ❑ शरीर भारी रहता है।
- ❑ खट्टी डकारें आती हैं।
- ❑ गले में जलन होती है।
- ❑ भोजन नहीं पचता है।
- ❑ भोजन में अरुचि हो जाती है।
वातपित्त ज्वर के लक्षण
- ❑ मुँह सूखता है।
- ❑ नींद अच्छी नहीं आती है।
- ❑ सारे शरीर में दर्द होती है।
- ❑ जँभाई अधिक आती है।
- ❑ शरीर में जलन महसूस होती है।
- ❑ भोजन में अरुचि लगती है।
- ❑ मूर्छा आती है।
वातकफज्वर के लक्षण
- ❑ शरीर भारी-भारी लगता है।
- ❑ पेट में दर्द होती है।
- ❑ खौंसी होती है।
- ❑ नींद नहीं आती।
- ❑ भोजन में अरुचि हो जाती है।
कफपित्त ज्वर के लक्षण
- ❑ बार-बार प्यास लगती है।
- ❑ शरीर ठंडा रहता है।
- ❑ मुख कड़वा हो जाता है।
- ❑ आलस्य हो जाता है।
- ❑ खौंसी आती है।
- ❑ भोजन में अरुचि होती है।
कफज्वर के लक्षण
- ❑ पेशाब, आँखें, नाखून सब सफेद हो जाते हैं।
- ❑ आलस्य होता है और उसके कारण नींद भी अधिक आती है।
- ❑ शरीर भारी-सा लगने लगता है।
- ❑ भोजन करने का दिल नहीं करता है।
- ❑ मल-विसर्जन में कठिनाई होती है।
- ❑ खौंसी होती है।
पित्तज्वर के लक्षण
- ❑ अधिक प्यास सताती है।
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साहिब बन्दगी
- □ मुँह सूखने लगता है।
- □ अधिक पसीना आता है।
- □ पेशाब पीला आता है।
- □ आँखें भी पीली हो जाती हैं।
- □ उलटियाँ होती हैं।
- □ नींद नहीं आती है।
- □ आँखों में जलन के साथ दर्द होती है।
- □ होंठ सूखे रहते हैं।
- □ हृदय में जलन होती है।
- □ सिर गर्म रहता है।
- □ मुख कड़वा लगता है।
- □ शरीर में व्याकुलता होती है।
वातज्वर के लक्षण
- □ मुख, गला, होंठ आदि सूखने लगते हैं।
- □ शरीर में कंपन होती है।
- □ आलस्य रहता है।
- □ शरीर में ताप रहता है और पीड़ा का अनुभव होता है।
- □ मुँह का स्वाद फीका हो जाता है।
- □ पेट में दर्द होने लगता है।
- □ अधिक जंभाई आती है।
- □ नींद नहीं आती।
मूत्रकृच्छ्र के लक्षण
- □ लिंग, पेट, जाँघ में पीड़ा का अनुभव होता है।
सेहत संजीवनी
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- □ मूत्र बार-बार होता है।
- □ यदि लाल, पीला, गर्म मूत्र पीड़ा सहित आए तो पित्त-मूत्रकृच्छ होता है।
- □ यदि मूत्र में झाग आए, लिंग और पेडू भारी लगेँ, मूत्र त्याग में पीड़ा हो तो कफ-मूत्रकृच्छ होता है।
उपदंश के लक्षण
- □ मुख काला पड़ जाता है।
- □ पेशाब में कड़क होती है।
- □ भूख नहीं लगती है।
- □ ज्वर होता है।
श्वास रोग के लक्षण
- □ मल-मूत्र ठीक से नहीं होता है।
- □ रोगी लंबे-लंबे श्वास लेता है, जिसका स्वर दूर तक सुनाई देता है।
- □ अपफारा होता है।
कफोदर के लक्षण
- □ नींद बहुत आती है।
- □ भोजन का दिल नहीं करता।
- □ शरीर ठंडा और भारी रहता है।
- □ पीड़ा का अनुभव होता है।
- □ पेट आवाज करता है।
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साहिब बन्दगी
पित्तोदर के लक्षण
- ❑ चमड़ी पीली पड़ जाती है।
- ❑ मुँह कड़वा लगने लगता है।
- ❑ प्यास बहुत सताती है।
- ❑ पसीना भी बहुत आता है।
- ❑ सिर चकराता है।
- ❑ ज्वर हो जाता है।
वातोदर के लक्षण
- ❑ आँखें, नाखून, चमड़ी सब काले पड़ जाते हैं।
- ❑ शरीर भारी रहता है।
- ❑ रूखी खाँसी होती है।
- ❑ अफारा होता है।
- ❑ पेट से आवाज होती है।
कफपाण्डु रोग के लक्षण
- ❑ शरीर में सूजन हो जाती है।
- ❑ आलस्य होता है।
- ❑ शरीर भारी हो जाता है।
- ❑ मूत्र सफेद रंग का हो जाता है।
- ❑ नेत्र भी सफेद हो जाते हैं।
- ❑ मुख से बार-बार थूक निकलता है।
वातपाण्डुरोग के लक्षण
- ❑ मूत्र काला और लाल हो जाता है।
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- ❑ अफारा होता है।
- ❑ त्वचा और नेत्र रूखे हो जाते हैं।
पित्तपांडु के लक्षण
- ❑ मल-मूत्र पीला हो जाता है।
- ❑ शरीर पीला पड़ जाता है।
- ❑ ज्वर होता है।
- ❑ मल पतला हो जाता है।
आमवात के लक्षण
- ❑ भोजन में अरुचि लगती है।
- ❑ शरीर भारी लगने लगता है।
- ❑ प्यास बहुत लगती है।
- ❑ बुखार हो जाता है।
- ❑ आलस्य आ जाता है।
- ❑ अंगों में सूजन हो जाती है।
Three decorative floral symbols, each consisting of a stylized flower or leaf pattern, arranged horizontally in a row.
सेहत संजीवनी दवाएँ
सेहत संजीवनी दवाएँ
बवासीर की दवा
- □ नागकेसर में बराबर मात्रा की मिश्री मिलाकर मक्खन के साथ सुबह-शाम रोगी को दें। मात्रा 5 ग्राम हो। यह खूनी बवासीर की अच्छी दवा है।
- □ सूरन का भरता बनाएँ और दही के साथ रोगी को खिलाएँ। यह खूनी बवासीर की दवा है।
- □ निसोथ और कलमी शोरा-दोनों को मिलाकर छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। सुबह-शाम 1-1 गोली रोगी को दें और यदि फोड़ा हो तो यह गोली वहाँ भी घिसकर लगाएँ।
- □ काले तिलों को मक्खन के साथ सुबह-सुबह खाएँ।
- □ निबौरी की गिरी, लहसुन, हींग, सज्जी-सब 25-25 ग्राम लेकर 100 ग्राम गुड़ के साथ कूटपीसकर मिलाएँ। छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। सुबह-शाम 1-1 गोली रोगी को खिलाएँ।
पेट के रोग की दवा
- □ आँवला, हरड, बहेड़ा, सनाय की पत्ती, काला नमक-सबको समान मात्रा में लेकर कूटपीस लें। फिर किसी साफ कपड़े से छानकर नीबू के रस में गोलियाँ बना लें। सुबह-शाम 1-1 गोली रोगी को दें। कम-से-कम 7 दिन तक यह दवा रोगी को दें।
- □ पेट-दर्द ठीक करती है।
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सेहत संजीवनी
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- □ आँव में लाभकारी है।
- □ 60 ग्राम काला नमक, 60 ग्राम काली मिर्च, 60 ग्राम आक के फूल-सबको कूटपीस करके छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। सुबह-शाम 1-1 गोली खाएँ।
- □ दस्त की अच्छी दवा है।
- □ वायुगोला भी ठीक हो जाता है।
- □ कच्चा भोजन खाने से अगर पेट में दर्द हो तो गर्म पानी में नमक मिलाकर उलटी करें और अच्छी तरह से भूख लगने पर ही खाना खाएँ।
- □ जम्हीरी नीबू के रस में 10-10 ग्राम पाँचों नमक, 10 ग्राम पीपर और 10 ग्राम हरड को कूटपीस लें। छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। एक गोली ही काफ़ी है।
- □ यह दवा अजीर्ण रोग को भी दूर करती है।
- □ दस्त लगे हों तो वो भी बंद हो जाते हैं।
- □ पेट में वायु के कारण पीड़ा हो तो वो भी दूर हो जाती है।
- □ धनियाँ, बच, पीपलामूल, बड़ा कचूर, हींग, चीता, मिर्च, पीपल, जवाखार, जीरा, तुलसी, अमलतास, पाँचों नमक, सजीखार, अदरक, अनार की छाल-सब बराबर मात्रा में ले कूटपीसकर छान लें। 5 ग्राम यह चूर्ण रोज खाएँ।
- □ सर्व उदर रोग की बढ़िया दवा है।
बार-बार दस्त से उत्पन्न रोगों की दवा
- □ अकरकरा, पीपर, काली मिर्च, लौंग, अदरक-सब 3-3 ग्राम लेकर कूटपीस लें और फिर अदरक के रस के साथ छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। सुबह-शाम 1-1 गोली रोगी को दें।
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साहिब बन्दगी
आधेसिर में दर्द की दवा
- □ घी, सुपारी और मिश्री—तीनों समान मात्रा लेकर दूध में घिसें और फिर रोगी को सुँघाएँ।
सिर के रोग की दवा
- □ पीपल, गुड़, अदरक-रस, संधानमक-सबको पानी में घिसें और रोगी को सुँघाएँ।
- □ 5 ग्राम मिर्ची, 25 ग्राम चौलाई, 12 ग्राम अदरक लेकर पीस लें। जब लेप तैयार हो जाए तो इसका लेप रोगी के सिर पर करें।
- □ घी, त्रिफला और मिश्री मिलाकर रोगी को एक तोला यह दवा खिलाएँ।
गठिया की दवा
- □ हंसराज, सौफ की जड़, सौफ, मकाया, मुलहठी, कासनी की जड़, कासनी के बीज, बबूल के फूल—सबको पानी में डालकर काढ़ा तैयार कर लें।
- □ यह काढ़ा गठिया को समाप्त करता है।
- □ 12 ग्राम हरड, 7 ग्राम मेंहदी की पतियाँ, 25 ग्राम सनाय, 12 ग्राम बादाम, 4 ग्राम केसरी, 10 ग्राम सफेद निसोथ लेकर कूटपीस लें। फिर चूर्ण के बराबर मिश्री कूटकर मिला लें। अब किसी साफ कपड़े से छान लें। 25 ग्राम यह चूर्ण सुबह लें।
- □ 35 ग्राम कुचला, 50 ग्राम लहसुन, 250 ग्राम मीठा तेल, 35 ग्राम दालचीनी, 35 ग्राम खाने की सुरती, 10 ग्राम भिलावां—सबको कूटपीसकर मिला लें और धीमी आँच पर रखें। दवा जल जाए तो तेल छानकर किसी शीशी में रख दें।
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❑ कहीं भी दर्द हो, इस तेल से मालिश करें।
पेट के कीड़ों की दवा
❑ हरडि, जवाखार, बायबिडंग, सुपारी, सेंधा नमक—सब बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह से कूटपीस लें। अब किसी साफ कपड़े से छान लें। 8 ग्राम यह दवा गाय की छाछ के साथ रोगी को दें तो बहुत लाभ होगा।
भांग के नशे की दवा
- ❑ अदरक का चूर्ण गाय के दही के साथ मिलाकर रोगी को दें।
- ❑ 60 ग्राम अंगूर को पीसकर पानी में छान लें। फिर काली मिर्च, जीरा, नमक आदि मिलाकर सेवन करें।
- ❑ जामुन के पेड़ की नवीन कोपलें खिलाएँ।
- ❑ सरसों के तेल को गर्म करके गुनगुना करके थोड़ा-थोड़ा सावधानी सहित कानों में थोड़े-थोड़े अन्तराल में तब तक डालते रहें जब तक होश न आ जाए।
- ❑ 20 ग्राम जामुन के पत्ते लेकर उन्हें पानी में घोंटें और ठंडाई बनाकर दें। यह दवा 2-3 बार पिलाएँ।
- ❑ छाछ पिलाएँ।
- ❑ अमरूद खिलाएँ।
कनेर के नशे की दवा
- ❑ भैंस के दही में मिश्री मिलाकर रोगी को दें।
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साहिब बन्दगी
धतूरे के नशे की दवा
- ❑ बैंगन के बीजों का रस निकालकर रोगी को दें।
- ❑ दूध में मिश्री मिलाकर रोगी को दें।
अफीम के नशे की दवा
- ❑ दूध में बड़ी कटरी का रस मिलाकर रोगी तो पिलाएँ।
- ❑ 1 ग्राम हीरा हींग को 65 ग्राम पानी में घोलकर थोड़े-थोड़े अन्तराल में 2-3 बार दें।
मूत्राशय की पथरी की दवा
- ❑ ककड़ी के बीज के साथ सनाय खाएँ।
कफोदर की दवा
- ❑ नागरमोथा, मिर्च, अदरक, पीपल-सबको पानी में डाल आग पर रखें और काढ़ा बना लें। फिर इसमें अरंडी का तेल और गोमूत्र मिलाकर पीएँ।
- ❑ अरंडी का तेल और लोहचूर्ण दूध में मिलाकर सेवन करें।
- ❑ आधा किलो अदरक, 3 किलो घी, 600 ग्राम नागरादि तेल, आधा किलो त्रिफला-सबको कूटपीसकर मिला लें। 25 ग्राम यह दवा दही के साथ सेवन करें।
- ❑ वायुगोला को दूर करता है।
- ❑ कफोदर और अन्य उदर के रोगों को दूर करता है।
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पित्तोदर की दवा
- □ त्रिफला और निसोथ का काढ़ा बनाकर उसमें घी डालकर पीएँ।
वातोदर की दवा
- □ पीपल, जवाखार, बच, हींग, नमक, सेंधा नमक, काला नमक, जीरा, कूट, अजवाइन, चीता, अदरक, सजीखार, मिर्च, जायफल, चाव-सबको कूटपीसकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण गर्म पानी के साथ खाएँ।
( आमवात, भगंदर... )
- □ 500 ग्राम गूगुल, 800 ग्राम त्रिफला, 225 ग्राम गिलोय-सबको तीन गुने पानी में डालकर आग पर रखें। जब तीसरा हिस्सा रह जाए तो उतारकर छान लें। बाद में त्रिफला, तज, दाल्यून, निसोथ, बायबिडंग, गिलोय, कूट-सब डेढ़ किलो लेकर चूर्ण कर लें और ऊपर की दवा में डाल दें। काढ़ा तैयार कर लें। 12 ग्राम इस दवा का सेवन करें।
- □ आमवात को दूर करता है।
- □ परमा को दूर करता है।
- □ भगंदर रोग को शांत करता है।
संग्रहणी रोग की दवा
- □ सिंगरफ और सोहागा-दोनों बराबर मात्रा में लेकर कूटपीसकर छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। यदि दिन के समय दस्त हों तो नीबू के साथ खाएँ और यदि रात के समय हों तो शहद के साथ खाएँ।
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साहिब बन्दगी
अधिक छींकों की दवा
- □ धनिया की पत्ती सूर्यें।
- □ चंदन को घिसकर सूर्यें।
कान के दर्द की दवा
- □ कडू का तेल, मूली का रस और मंदार के पत्तों का रस-बराबर मात्रा (एक पाव) मिलाकर आग पर रखें। दवा जल जायेगी और तेल रह जायेगा। अब यह थोड़ा-सा तेल रोगी के कान में डालें।
- □ अदरक का रस, शहद, कडू का तेल, सेंधा नमक-सबको मिलाकर आग पर रखें। गर्म हो जाने पर उतार लें। सहने योग्य गर्म दवा कान में डालें।
- □ समुद्रफेन थोड़ी-सी कान में डालें। उसके बाद नींबू का रस भी डालें। यह दवा अत्यंत हितकारी है।
- □ मदार के पत्ते और सेहूँड के पत्ते का रस निकालकर गर्म करें और कान में डालें। यह दवा बड़ी लाभकारी है।
- □ सौफ, बच, अदरक, देवदारू-सबको बकरी के दूध के साथ पीसकर साफ कपड़े से छान लें। सुबह-शाम गर्म करके कान में डालें। यह दवा 7 दिन तक दें।
- □ पीपरी, सेंधा नमक और मिश्री-तीनों का बराबर मात्रा में लेकर पीस लें। इस दवा को सूर्ये से कान की पीड़ा से आराम मिलता है।
हैजा
- □ 1 तोला अरहर के पत्ते, 1 मासे मिर्च लेकर घोटें। इसमें एक पाव पानी डालकर रोगी को पिलाएँ।
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- □ हैजे की अत्यंत लाभकारी दवा है।
- □ बिजौरा नींबू के 16 बीज 25 ग्राम पानी के साथ मिश्री सहित रोगी को पिलाएँ।
- □ 5 ग्राम पेठे के फूल पानी में पीसकर पीएँ।
( कुछ रोग, बवासीर... )
- □ डेढ़ किलो आँवला, 900 ग्राम हरड, 600 ग्राम धमासा, 250 ग्राम बिसाला, 250 ग्राम दशमूल, 1 किलो पोहकरमूल, 50 ग्राम बायबिडंग, 50 ग्राम मुलहठी, 50 ग्राम लोध, 50 ग्राम चवक, 50 ग्राम मजीठ, 350 ग्राम खैरसार, 500 ग्राम गुरुची, 1 किलो चीता 180 ग्राम बिजौरा, 50 ग्राम मेदा, 50 ग्राम महामेदा, 50 ग्राम जीवक, 50 ग्राम जीरा, 50 ग्राम पीपल, 50 ग्राम हल्दी, 50 ग्राम पित्तपापड़ा, 50 ग्राम अदरक, 50 ग्राम मेढ़ासिंगी, 50 ग्राम नागकेसर, 50 ग्राम जटामासी, 50 ग्राम इलायची, 50 ग्राम चिकनी, 50 ग्राम कंकोल, 50 ग्राम क्षीरकाकोली, 50 ग्राम वृद्धि, 50 ग्राम सतावरी, 50 ग्राम ऋद्धि, 50 ग्राम ऋषभक, 50 ग्राम कचूर, 50 ग्राम पद्याख, 50 ग्राम काबुली हरड, 50 ग्राम राखा, 50 ग्राम इन्द्रयव, 50 ग्राम नागरमोथा—सबको चौगुने पानी में डालकर आग पर रखें और काढ़ा तैयार कर लें। जब आधा पानी रह जाए तो उसमें डेढ़ किलो धौ के फूल, 250 तोले दाख, 200 ग्राम गुड़, डेढ़ किलो शहद मिलाकर घी के चिकने बर्तन में रखें। अब मिर्च और जटामासी का चूर्ण बनाकर धूप में रखें। फिर 100 ग्राम चन्दन, 100 ग्राम जायफल, 100 ग्राम दालचीनी, 100 ग्राम पीपल, 100 ग्राम बाला, 100 ग्राम लौंग, 100 ग्राम इलायची, 100 ग्राम नागकेसर, 100 ग्राम इलायची, 100 ग्राम
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साहिब बन्दगी
तमालपत्र, 100 ग्राम केसर, 12 ग्राम कस्तूरी-सबको घड़े में डालकर मुँह बंद करें और जमीन में गाढ़ दें। 16 दिन के बाद निकालकर खाएँ।
- □ 17 तरह के कुछ रोग को दूर करता है।
- □ पांडुरोग का नाश करता है।
- □ पेट के रोगों को समाप्त करता है।
- □ बवासीर को खत्म करता है।
- □ रक्तप्रदर को ठीक करता है।
- □ मूत्रकृच्छ्र को नष्ट करता है।
- □ श्वास रोग को दूर करता है।
- □ बाँझपन को दूर करता है।
- □ गिलोय, बाँसा, नीम, कडू परवर, कटेली-सब 600-600 ग्राम लेकर कूटपीसकर एक दोना (पते का बना एक कटोरानुमा पात्र) पानी में डालकर आग पर रखें। जब चौथा हिस्सा रह जाए तो इस काढ़े में 500 ग्राम घी और 500 ग्राम त्रिफल का काढ़ा मिलाएँ। जब घी सिद्ध हो जाए तो रोगी को खिलाएँ।
- □ कुछ रोग दूर होता है।
- □ वातरोग को नष्ट करता है।
- □ कफ, पित्त और वात-तीनों प्रकार के रोगों का नाश करता है।
- □ बवासीर को खत्म करता है।
- □ खाँसी को दूर करता है।
- □ त्रिकुटा, नागरमोथा, मीठा तेलिया, गुड़, बायबिडंग, बच, चीता-सब समान मात्रा में लेकर कूटपीसकर लेप करें।
- □ कुछ रोग को दूर करता है।
- □ 5 तोले भुने हुए चने और सेहूँड का आधा किलो दूध-दोनों को मिला लें। फिर छोटी-छोटी बेर समान गोलियाँ बना लें।
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- □ कुछ रोग को नष्ट करता है।
- □ 350 ग्राम बायबिडंग, 350 ग्राम त्रिफला चूर्ण, 50 ग्राम पोहकर्मूल, 100 ग्राम गूगुल, 25 ग्राम शिलाजीत, 500 ग्राम बावची, 25 ग्राम दालचीनी, 25 ग्राम नागरमोथा, 25 ग्राम मिर्च, 25 ग्राम अदरक, 25 ग्राम लोहभस्म, 12 ग्राम निसोथ, 25 ग्राम पीपल, 25 ग्राम तमालपत्र, 25 ग्राम केसर-सबको कूटपीसकर मिला लें। फिर दवा कीसमान मात्रा में मिश्री पीसकर मिला लें। अब 50-50 ग्राम के लडू बना लें। सुबह-सुबह एक लडू खाया करें।
- □ सब तरह का वायुरोग दूर करता है।
- □ सन्निपात को खत्म करता है।
- □ कंठ के रोगों का नाश करता है।
- □ कुछ रोगों को समाप्त करता है।
- □ कफ और पित्त से उत्पन्न रोगों को भी खत्म करता है।
लकवा की दवा
- □ 35 ग्राम सन के बीज शहद में मिलाकर सुबह खाएँ। दो हफ्ते इसका सेवन करें।
- □ 10 ग्राम काली मिर्च, 10 ग्राम काला जीरा, 35 ग्राम बघ, 10 ग्राम पोदीना, 10 ग्राम कलौंजी-सबको कूटपीसकर किसी साफ कपड़े से छान लें। फिर एक पाव शहद मिलाकर खाएँ। दवा 6-7 ग्राम ही खाएँ।
- □ पक्षाघात को नष्ट करती है।
सिर दर्द की दवा
- □ गर्म पानी के साथ सनाय खाएँ।
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साहिब बन्दगी
( दमा, खाँसी... )
- □ चौकिया सोहागा, शंखिया- दोनों को अदरक के रस में मिलाकर पीसें। फिर इसकी गोलियाँ बनाकर अच्छी तरह सुखा लें। सुबह-शाम यह गोली दूध के साथ लेना बड़ा हितकारी है।
- □ 12 ग्राम लाल सज्जी, 50 ग्राम गुड़, 12 ग्राम राई, 12 ग्राम हल्दी-सबको कूटपीसकर छान लें। फिर छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। 1 गोली सुबह और 1 गोली शाम के समय सेवन करें।
- □ दमा ठीक होता है।
- □ 50 ग्राम मदार की अनखिली कली, 25 ग्राम लाहौरी नमक पीसकर छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। एक गोली रोज सुबह के समय सेवन करें।
- □ दमे की अच्छी दवा है।
- □ 1 मदार का पत्ता और 25 काली मिर्च पीसकर छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। 6-7 गोलियाँ रोज खाएँ।
- □ यह दवा दमें का नाश करती है।
- □ काली मिर्च, सफेद सज्जी, हल्दी, एलुवा-सबको कूटपीसकर छान लें और छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। 1 गोली रोज सेवन करें।
- □ इससे दमा ठीक होता है।
- □ 25 ग्राम ईसबन्द और 25 ग्राम अलसी पीसकर 50 ग्राम शहद में मिलाकर सेवन करें। 12 ग्राम यह दवा लें।
- □ खाँसी को नष्ट करती है।
- □ दमे का नाश करती है।
- □ 85 ग्राम गुड़, 50 ग्राम अदरक, 50 ग्राम पीपल, 50 ग्राम इलायची, 50 ग्राम मिर्च-सबको कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। 12 ग्राम यह
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चूर्ण सुबह-सुबह खाना बड़ा लाभ करता है।
- □ 12 ग्राम हरड् की बकली, 20 ग्राम रूसी की पत्तियाँ, 4 ग्राम बेंग, 15 ग्राम बहेड़े का बकल, 20 ग्राम भारंगी, 8 ग्राम पीपल-सबको कूटपीसकर छान लें। फिर बबूल का काढ़ा बनाकर इसमें यह दवा मिलाएँ। फिर शहद में मिलाएँ और छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। रोज एक गोली खाएँ।
- □ खाँसी को दूर करती है।
- □ श्वास रोग की बढ़िया दवा है।
- □ क्षय रोग दूर होता है।
- □ मंदार और सेहुँड् के पत्तों को बराबर मात्रा में लेकर आग पर रखें। फिर उनमें से रस निकाल लें। पते इतने हों कि रस आधा किलो तक निकले। फिर 40 ग्राम अडूस के पते लेकर उन्हें एक किलो दूध में डालकर आग पर रखें। तीसरा हिस्सा रहने पर उतारें और छान लें। फिर ऊपर का रस भी उसमें मिला लें और पुनः आग पर रखें। गाढ़ा हो जाने पर उसमें छोटी इलायची, पीपल, अदरक, लौंग, सोहागा-सब 10-10 ग्राम लेकर कूटपीस और छानकर डालें। फिर उसकी छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। सुबह-शाम 1-1 गोली खाएँ।
- □ इससे खाँसी को आराम मिलता है।
- □ दमा रोग नष्ट होता है।
- □ बायबिडंग, चित्रक, सोहागा, जमालगोटा, अदरक, संधा नमक, मिर्च, हींग, चीता, हल्दी, सिंगरफ-सब बराबर मात्रा में लेकर कूटपीसकर छान लें। 2 रत्ती की छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। सुबह-शाम 1-1 गोली शीतल जल के साथ लें।
- □ कफ को समाप्त करता है।
- □ खाँसी को दूर करता है।
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साहिब बन्दगी
□ वायु की खराबी का नाश करता है।
कफपांडु की दवा
- □ अदरक और दशमूल को पानी में डालकर काढ़ा तैयार कर लें।
- □ कफपांडु को समाप्त करता है।
- □ संग्रहणी रोग को दूर करता है।
- □ खाँसी को दूर करता है।
- □ ज्वर को भी दूर करता है।
पित्त्पांडु की दवा
- □ 12 किलो आँवले का रस लेकर धीमी आँच पर रखें। फिर उसमें 100 ग्राम मुलहठी, 100 ग्राम अदरक, 100 ग्राम बंशलोचन, 500 ग्राम मुनक्का, ढाई किलो चीनी, 500 ग्राम पिप्पली, 500 ग्राम शहद डालें। यह दवा अत्यंत गुणकारी है।
- □ पित्त्पांडुरोग का नाश करती है।
वातपांडु रोग की दवा
- □ 200 ग्राम बायबिडंग, साढ़े तीन किलो पुराना गुड़, 400 ग्राम आँवला, 400 ग्राम हरड, 400 ग्राम बहेड़ा, 100 ग्राम जलवैत, ढाई किलो शुद्ध मंड़ुर, 100 ग्राम चीता, 200 ग्राम पीपल, ढाई किलो लोहे के अत्यंत छोटे-छोटे टुकड़े-सबको किसी बर्तन में डालकर 12 किलो पानी डाल दें। फिर 15 दिन तक रख दें। बाद में इसका सेवन करें।
- □ पाण्डु रोग का नाश करता है।
- □ बवासीर को समाप्त करता है।
सेहत संजीवनी
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- □ कुछ रोग को खत्म करता है।
- □ खाँसी को दूर करता है।
- □ श्वास को भी लाभ करता है।
- □ पिप्पली, हरड, आँवला, बहेड़ा, चीता, अदरक, मिर्च, नागरमोथा, बायबिडंग-सबको बराबर मात्रा में लेकर 8 हिस्से लोहचूर्ण लें। सबको कूटपीसकर शहद और घी मिलाएँ। यह दवा अत्यंत गुणकारी है।
छाती के दर्द की दवा
- □ शक्कर के साथ सनाय खाएँ।
- □ अनार के शरबत के साथ सनाए खाएँ।
- □ छाती के रोग दूर होते हैं।
- □ इमली के रस के साथ सनाय खाएँ।
- □ छाती का कफ समाप्त होता है।
अण्डकोष की दवा
- □ रेंडी का तेल और दूध मिलाकर पीएँ।
- □ जमीकन्द और पलाश का चूर्ण करके 20 दिन खाएँ।
सिर की गंज की दवा
- □ अरंडी की कॉपल कूटकर उसमें तेल मिलाकर लगाएँ।
सर्वज्वर की दवा
- □ चिरायता, पिप्पली, गुरुच, अदरक, धनियाँ-पाँचों 80-80 ग्राम लेकर कूटपीसकर चूर्ण कर लें। फिर 4 किलो पानी में डालकर