शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary
लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 118, कुल 511 में से
संदर्भ में पढ़ें११८ ] [ श्रीशारदा तिलक होम के द्रव्यों का प्रमाण कहा जाता है। होममें एक कर्ष तो घृत होना चाहिए और एक शुक्ति प्रमाण वाला पय बताया गया है ।१४२। उक्तानि पञ्चगव्यानि तत्समानि मनीषिभिः । तत्समे मधुदुग्धान्तमक्षमात्रमुदाहृतम् ।१४३ दधि प्रसृतिमात्रं स्याल्लाजाः स्युर्मुष्टिसंमिताः । पृथुकास्तत्प्रमाणः स्युः सक्तवोऽपि तथोदिताः ।१४४ गुडं पलार्द्धमानं स्याच्छर्करापि तथामता । ग्रासार्द्धं चरुमानं स्यादिक्षुः पर्वविधिर्मतः ।१४५ एकैकं पत्रपुष्पाणि तथाऽपूपानि कल्पयेत् । कदलीफलनारङ्गफलान्येकैकशोविदुः ।१४६ मातुलिङ्गं चतुः खण्डं पनस दशधा कृतम् । अष्टधा नारिकेलानि खण्डे तानि विदुर्बुधाः ।१४७ मनीषियों के द्वारा उनके समान ही पञ्च गव्य कहे गये हैं। उसके समान मधु-दुग्धान्त अक्षमात्र बताया गया है ।१४३। दधि एक प्रसृति परिमाण वाला होना चाहिए तथा लाजा मुष्टि के प्रमाण वाले होवे । उसी के परिमाण वाले पृथुक होवें और उसी भाँति सक्तु होने चाहिए जो बताये गये हैं ।१४४। गुड़ आधे पलके परिमाण वाला होवे और उसी भाँति शर्करा मानी गई है। चरु का मान ग्रास का आधा होवे और ईख एक पर्व की अवधि से अन्वित होना चाहिए-ऐसा ही माना गया है ।१४५। एक-एक पत्र और पुष्प होवे उसी भाँति अपूपों (पूओं) की कल्पना करनी चाहिए । कदली के फल-नारङ्गी के फल एक-एक ही जानने चाहिए ।१४६। मातुलिङ्ग का चतुर्थ खन्ड तथा पनस (कट- हर) का दशवां खन्ड होना चाहिए । आठवाँ भाग नारियल का फल होवे । बुध पुरुष इनको खन्डों में ही समझ लेवे ।१४७। त्रिधा कृतं फलं विल्वं कपित्थं खण्डितं त्रिधा । उर्वारुकफलं होमे चोदितं खण्डितं त्रिधा ।१४८