शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary
लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें१३६ [ श्री शारदा तिलक कर्त्ता पुरुष अविलम्ब ही थोड़े समय में साक्षात् भू मण्डल का इन्द्र हो जाया करता है ।७५ अमीभिः साधको हुत्वा वश्यादीनापि साधयेत् । हुत्वा लक्षं तिलैः शुद्धैर्मुच्यते सर्वपातकैः ।७६ पायसान्नेव जुहुयान्मन्त्री सर्वसमृद्धये । पद्मानां लक्षहोमेन महतीं श्रियमाप्नुयात् ।७७ घृतेन जुहुयाल्लक्षं प्राप्नुयात् कीर्त्तिमुत्तमाम् । जातीकुसुमहोमेन सर्वलोकं वशं नयेत् ।७८ संशोधितैस्त्रिमध्वक्तैर्लवणैर्लक्षमानतः । जूहूयाद्गुलिकाः कृत्वा वशयेत्सर्वमञ्जसा ।७९ लिखित्वा पत्रखण्डेषु मातृकार्णान्पृथक् पृथक् । अभ्यर्च्य जुहुयाद्वह्नौ तत्पत्राक्षरमुच्चरन् ।८० अभिचारहरो होमः सर्वरक्षाप्रसिद्धिदः । सहस्रहोमे वितरेद्दक्षिणान्निष्कमानतः ।८१ साधना करने वाला पुरुष इनके द्वारा हवन करके वश्य आदि को भी साधित कर लिया करता है। शुद्ध तिलों के ही द्वारा होम करके जो कि एक लाख आहुतियों को होना चाहिए, मनुष्य समस्त पातकों से छुटकारा पा जाया करता है ।७६। मन्त्रधारी पुरुष सब प्रकार की समृद्धि की प्राप्ति करने के लिये पायसान्न के द्वारा होम करे। एक लाख पद्मों के होम करने से मनुष्य बड़ी भारी श्री की प्राप्ति किया करता है ।७७। घृत से एक लाख आहुतियों के द्वारा होम करे तो वह उत्तम कीर्ति को प्राप्ति कर लिया करता है। जाती के कुसुमों के द्वारा होम करने से सम्पूर्ण लोक को अपने वश में कर लिया करता है। ।७८। संशोधित तीन मधुरों से अक्त लवणों से एक लाख मान वाला होम करे और गुलिका बनाकर करे तो तुरन्त ही सबको अपने वश में कर लिया करता है ।७६। पत्रों के खण्डों में मातृका के वर्णों को पृथक्- पृथक् लिखकर फिर उनका अभ्यर्चन करे और इसके अनन्तर उन पत्रों