शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary
लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंषष्ठ पटल ] १३७ के अक्षरों को मुख से उच्चारण करते हुए अग्नि से होम करे तो यह होम अभिचार के हरण करने वाला होता है और सबसे रक्षा करने वाला तथा प्रसिद्धि के देने वाला हुआ करता है। एक सहस्र के होम में एक निष्क प्रमाण की अवधि वाली दक्षिणा का वितरण करना चाहिए। = : ० ८ ५ । अर्द्धं वा शक्तितोद्याद्यथोक्तं फलमाप्नुयात् । तनया सप्त सञ्जप्तं पिवेत्प्रातर्दिने दिने ।८२ सलिलं स भवेद्वाग्मी लभते कवितां पराम् । ब्राह्मीरस वचा कल्कै पयसा विपचेद् घृतम् ।८३ अयुतं मातृकाजप्तमर्चितं च विधानतः । पिवेत्प्रातः स मेधावी भवेद्वाक्पतिसत्तमः ।८४ ब्राह्मीसहस्रसंजप्तां वचां वा पयसा पिवेत् । स लभेन्महतीं मेधामचिरान्नात्र संशयः ।८५ पूर्वोक्तं पङ्कज कृत्वा कुम्भं संस्थाप्य पूर्ववत् । क्वाथेन पूरयेन्मन्त्री यथावत् क्षीरशाखिनाम् ।८६ अष्टगन्धं विलोड्यास्मिन्नवरत्नसमन्विते । आवाह्य पूजयेद्देवीं मातृकामुक्तमार्गतः ।८७ अथवा एक निष्क सुवर्ण की दक्षिणा देने की शक्ति न होवे तो अपनी शक्ति के अनुसार ही देवें या आधा निष्क देवें । जैसा कहा गया है इसका भी वैसा ही फल प्राप्त किया करता है। इसके द्वारा सात बार जप किये हुए का प्रातःकाल में प्रतिदिन जल का पान करे तो वह पीने वाला वाग्मी हो जाता है और परम कवित्व की शक्ति का लाभ लिया करता है । ब्राह्मी बूँटी का रस और वच के कल्क को दूध के साथ घृत का पाचन करे और दश सहस्र मातृका के द्वारा अभिमन्त्रित और विधान से समचित करके प्रातःकाल पान करें तो वह परम मेधावी और श्रेष्ठ वाक्पति हो जाया करता है ।८२।८४। एक सहस्रवार जप की हुई ब्राह्मी अथवा वच को दूध के साथ पीवे तो वह पुरुष बड़ी भारी