भारतकोश
शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

शारदा तिलक तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Sharada Tilak Tantra with Hindi Commentary

लक्ष्मण देशिकेन्द्र / चमन लाल गौतम द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished511 पृष्ठ

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सप्तम पटल ] [ १५७ तत्समिद्भिश्च जुहुयात्कवित्वमतुलं लभेत् । एवं दशाक्षरी प्रोक्ता सिद्धये वाक्मिच्छताम् ।८० हृदयान्ते भगवति वद शब्दयुगं पुनः । वाग्देवि वह्निजायान्तं वाग्भवाद्यं समुद्धरेत् ।८१ मनुं षोडशवर्णाढ्यं वागैश्वर्यफलप्रदम् । मनोः षड्भिः पदैः कुर्यात्षडङ्गानि सजातिभिः ।८२ शुभ्रां स्वच्छविलेपमाल्यवसनां शीतांशुखण्डोज्ज्वलां व्याख्यामक्षगुणं सुधाढ्यकलशं विद्यां च हस्ताम्बुजैः । विभ्राणां कमलासनां कुचनतां वाग्देवतां सुस्मिताम् । वन्दे वाग्विभवप्रदां त्रिनयनां सौभाग्यसम्पत्करीम् ।८३ यह होम सब प्रकार के सौभाग्य-लक्ष्मी और वश्य के प्रदान करने वाला होता है । राज वृक्ष से समुत्पन्न पुष्पों से मधुर में आप्लुत करके और उसकी समिधाओं से होम करे तो अनुपम कवित्व की प्राप्ति कर लिया करता है । इस प्रकार से वाक् शक्ति की इच्छा रखने वालों के लिये यह दशाक्षरी सिद्धि के लिए बतलायी गयी है ।७९।८०।८१। हृदय के अन्दर ‘भगवती’ वद (यह शब्द दो बार) कहे । वाग्देवि-यह कहकर ‘वाग्भवाद्य’ स्वाहा’ यह कहे—ऐसे मन्त्र का उद्धार करना चाहिए । यह मन्त्र सोलह अक्षरों से युक्त है जो वाक् के ऐश्वर्य का फल का प्रदाता होता है । मन्त्र के छै स्वजाति पदों से षट् अङ्गों को करे ।८२ अब ध्यान बतलाया जाता है—परम स्वच्छ विलेपन और वस्त्र से सम- न्विता-परम शुभ्र-चन्द्र खण्ड के धारण करने से अतीव समुज्ज्वला कर कमलों में व्याख्या-अक्षमाला, सुधा से पूर्ण कलश और विद्या को धारण करन वाली—कमल के आसन पर विराजमान—कुच युगल के भार से नम्रा-सुन्दर स्मित वाली-वाग्विभव की प्रदात्री—तीन नयनों से युक्त- सौभाग्य और सम्पदा करने वाली देवी की मैं वन्दना करता हूँ ।८३।